ब्रेजनेवका बनाम ख्रुश्चेवका: कौन-सी व्यवस्था रहने के लिए अधिक सुविधाजनक है?
बिना किसी भ्रम के सोवियत यूनियन में आवास निर्माण के दो युगों की तुलना करना
द्वितीयक आवास बाजार में, दो-तिहाई घर शून्यकालीन सोवियत युग के हैं। “ख्रुश्चेवका” एवं “ब्रेज़नेवका” रूस के आवासीय भंडार का मुख्य हिस्सा हैं, लेकिन आपको कौन-सा चुनना चाहिए? रियल एस्टेट एजेंट “क्षेत्र एवं स्थान” की बात करते हैं, लेकिन दैनिक जीवन में सुविधा को नजरअंदाज कर देते हैं। क्या आधुनिक उपकरण “ख्रुश्चेवका” में फिट हो पाएंगे? क्यों “ब्रेज़नेवका” में हमेशा ठंड रहती है? और क्या वाकई “खराब हुए” “ख्रुश्चेवका” “अच्छे” “ब्रेज़नेवका” से बेहतर हैं? आइए, बिना किसी पक्षपात के दोनों युगों की तुलना करते हैं。
**ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** क्यों ये इतने अलग हैं?
“ख्रुश्चेवका” 1957 से 1985 के बीच बनाए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य तेजी से सामूहिक आवास प्रदान करना था। निकिता ख्रुश्चेव ने 1980 तक हर परिवार को अलग आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा। आर्किटेक्टों पर सख्त प्रतिबंध लगे थे – न्यूनतम लागत, अधिकतम आवासों की संख्या, एवं तेजी से काम पूरा करना।
“ब्रेज़नेवका” 1964 से 1982 के बीच बनाए गए, जिनमें “ख्रुश्चेवका” की त्रुटियों को दूर करने की कोशिश की गई। नए मापदंडों से कमरों का क्षेत्रफल बढ़ गया, लेकिन लागत अभी भी कम ही रही। प्रति वर्ष एक मिलियन आवास बनाए गए।
ये ऐतिहासिक परिस्थितियाँ ही “ख्रुश्चेवका” एवं “ब्रेज़नेवका” की विशेषताओं का कारण हैं। “ख्रुश्चेवका” सामूहिक आवास एवं सामान्य जीवनस्थल का मिश्रण है, जबकि “ब्रेज़नेवका” आवास को अधिक आरामदायक बनाने की कोशिश है, बिना निर्माण लागत में बहुत वृद्धि किए।
**क्षेत्रफल:** प्रत्येक वर्ग मीटर का महत्व है
क्षेत्रफल ही सबसे पहले ध्यान आने वाली बात है। “ख्रुश्चेवका” के एक-कमरे वाले आवास 28 वर्ग मीटर से शुरू होते हैं, जबकि “ब्रेज़नेवका” में यह 33 वर्ग मीटर है। दो-कमरे वाले आवासों में अंतर और भी ज्यादा है – 42-46 वर्ग मीटर बनाम 52-54 वर्ग मीटर।
लेकिन समस्या केवल कुल क्षेत्रफल में ही नहीं है। “ख्रुश्चेवका” में भंडारण स्थलों की कमी है – कपड़े रखने के लिए छोटी जगह, 40 सेंटीमीटर गहराई वाले अंतर्निहित वॉलेट… “ब्रेज़नेवका” में तो ठीक से वॉलेट एवं छत के ऊपर भंडारण स्थल उपलब्ध हैं।
“ख्रुश्चेवका” में रसोई 5-6 वर्ग मीटर के क्षेत्र में है, जहाँ फ्रिज एवं स्टोव भी ठीक से नहीं फिट हो पाते। “ब्रेज़नेवका” में रसोई 7-9 वर्ग मीटर के क्षेत्र में है, जहाँ डिशवॉशर एवं छोटा सोफा भी रखा जा सकता है।
छत की ऊँचाई भी महत्वपूर्ण है। “ख्रुश्चेवका” में छत 2.5 मीटर, जबकि “ब्रेज़नेवका” में 2.7 मीटर है। यह छोटा सा अंतर भी छोटे कमरों में स्पष्ट रूप से महसूस होता है。
**डिज़ाइन:** एकातेरीना लियोनोवा; **लेआउट के मुद्दे:** कार्यक्षमता बनाम किफायत
“ख्रुश्चेवका” के लेआउट में किफायत ही सर्वोपरि थी। गलियाँ, संयुक्त बाथरूम, कंधों की चौड़ाई जितने निचले गलियारे… सब कुछ तो प्रत्येक वर्ग सेंटीमीटर को बचाने हेतु ही था।
“ख्रुश्चेवका” की सबसे बड़ी कमी गलियाँ हैं… दो-कमरे वाले आवास में एक कमरा तो अनिवार्य रूप से गलियारे के रूप में ही इस्तेमाल होती है… ऐसे आवासों में परिवारों को निजता ही एक विलास है।
“ब्रेज़नेवका” में लेआउट में काफी बदलाव आया… अलग-अलग कमरे, स्वतंत्र बाथरूम… गलियारे भी चौड़े हो गए… कुछ सीरीज में तो हर कमरे में बालकनी भी दी गई।
लेकिन “ब्रेज़नेवका” में भी कुछ कमियाँ हैं… लंबे गलियारे उपयोगी जगह को घेर लेते हैं… कुछ सीरीज में तो बाथरूम इतना संकीर्ण होता है कि वॉशिंग मशीन भी शौचालय के ऊपर ही रखनी पड़ती है।
**तकनीकी सुविधाएँ:** क्या संभव है, क्या नहीं?
“ख्रुश्चेवका” में बिजली की प्रणाली 3-5 किलोवाट क्षमता वाली है… ऐसी प्रणाली में आधुनिक उपकरण नहीं चल सकते… एयर कंडीशनर, डिशवॉशर, इलेक्ट्रिक स्टोव… सब कुछ एक साथ चलाने पर सर्किट ब्रेक हो जाता है।
“ब्रेज़नेवका” में बिजली की क्षमता 7-10 किलोवाट है… आप इलेक्ट्रिक स्टोव लगा सकते हैं, एयर कंडीशनर भी… लेकिन पूरे उपकरणों हेतु पुन: बिजली की प्रणाली लगाना आवश्यक हो सकता है।
“ख्रुश्चेवका” में पाइपलाइनें 50 मिमी व्यास की हैं… 10-15 साल में ही ये जाम हो जाती हैं… पानी का दबाव भी कम रहता है… “ब्रेज़नेवका” में पाइपलाइनें मोटी हैं, प्रणाली भी बेहतर तरीके से डिज़ाइन की गई है।
“ख्रुश्चेवका” में हीटिंग प्रणाली सरल लेकिन प्रभावी है… एक ही पाइप में ही हीटर लगे होते हैं… “ब्रेज़नेवका” में दो पाइपों की प्रणाली होती है, जिससे तापमान अच्छी तरह नियंत्रित हो सकता है।
**ध्वनि-नियंत्रण:** पड़ोसियों की आवाजें…
“ख्रुश्चेवका” में दीवारें 18 सेंटीमीटर मोटी हैं… इसलिए पड़ोसियों की आवाजें साफ-साफ सुनाई देती हैं… आप पड़ोसियों को बात करते, टीवी देखते, या शौचालय जाते सुन सकते हैं… आंतरिक दीवारें भी 8-10 सेंटीमीटर मोटी हैं…
“ब्रेज़नेवका” में दीवारें 20-25 सेंटीमीटर मोटी हैं… इसलिए ध्वनि-नियंत्रण की सुविधा थोड़ी बेहतर है… हालाँकि, अभी भी पड़ोसियों की आवाजें सुनाई देती हैं… लेकिन कम ही।
**कुछ विशेषताएँ:** पैनल-बिल्डिंगों में ध्वनि प्रसार… “ख्रुश्चेवका” में यह समस्या अधिक है… ऊपर से आने वाली कदमों की आवाजें तो बिल्कुल ही तेज़ सुनाई देती हैं… “ब्रेज़नेवका”, खासकर इमारतों में, इस मामले में थोड़ी बेहतर हैं।
**पुन: निर्माण की संभावनाएँ:** पुराने आवासों का क्या होगा?
मॉस्को में पुन: निर्माण कार्यक्रम मुख्य रूप से “ख्रुश्चेवका” पर ही केंद्रित था… क्योंकि ये आवास भौतिक एवं मानसिक रूप से अधिक पुराने हैं… ऐसे आवासों का पुन: निर्माण करके नए आवास प्राप्त किए जा सकते हैं… लेकिन यह भी संभव है कि इससे लंबे समय तक समस्याएँ ही जारी रहें।
“ब्रेज़नेवका” पर पुन: निर्माण कार्यक्रम कम ही लागू हुआ… क्योंकि माना जाता है कि इन आवासों की उम्र अभी भी पूरी नहीं हुई है… इन्हें लगभग 20-30 साल तक कोई बड़ी मरम्मत की आवश्यकता ही नहीं होगी।
कुछ क्षेत्रों में स्थिति अलग है… वहाँ “ख्रुश्चेवका” एवं “ब्रेज़नेवका” दोनों ही लंबे समय तक उपयोग में आ सकते हैं… क्योंकि वहाँ पुन: निर्माण हेतु पर्याप्त धनराशि ही उपलब्ध नहीं है।
**निष्कर्ष:** चयन… आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा!
- “ख्रुश्चेवका” उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो पुन: निर्माण करने के इच्छुक हैं… एवं शहर के केंद्रीय इलाकों में रहना चाहते हैं… ऐसे आवासों को पुन: सुधारकर आधुनिक जीवनस्थल बनाया जा सकता है… मुख्य लाभ: कीमत, स्थान, पुन: निर्माण की संभावनाएँ।
- “ब्रेज़नेवका” उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो पहले से ही तैयार आवास चाहते हैं… अधिक जगह, बेहतर लेआउट… कम पुन: निर्माण की आवश्यकता… नुकसान: अधिक कीमत, अक्सर शहर के बाहरी इलाकों में स्थित होना।
**युवा परिवारों के लिए:** बच्चों के बिना, अच्छे इलाकों में स्थित “ख्रुश्चेवका” ही उपयुक्त है… लेकिन बच्चों वाले परिवारों के लिए “ब्रेज़नेवका”, जहाँ अलग-अलग कमरे हों, बेहतर विकल्प है… वृद्ध लोगों के लिए “ख्रुश्चेवका” ही अधिक आरामदायक है… क्योंकि सफाई की जगह कम है, बिजली-पानी के बिल भी कम हैं।
**मुख्य नियम:** केवल एक विशेष आवास ही खरीदें… “अच्छा” “ख्रुश्चेवका”, जिसे पुन: सुधारकर उपयोग में लाया जा सके, “खराब” “ब्रेज़नेवका” से कहीं बेहतर है।
**कवर:** डिज़ाइन परियोजना – एकातेरीना लियोनोवा
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