15 हजार रूबल के लिए उपलब्ध “डिक्लटरिंग कोर्स” से प्राप्त मुख्य बिंदु – संक्षिप्त एवं सच्चे।
ध्यान दें!
अतिरिक्त सामान हटाने संबंधी कोर्स अब एक वास्तविक रुझान बन गए हैं। “स्थान का सही ढंग से संचालन” करने में माहिर व्यक्ति 5 से 20 हजार रुबल शुल्क लेकर यह सिखाते हैं कि अतिरिक्त सामान कैसे ठीक से हटाया जाए। वे वादा करते हैं कि ऐसा करने से आपकी जिंदगी बदल जाएगी, आपमें आंतरिक सामंजस्य आ जाएगा एवं खुशी के लिए जगह उपलब्ध हो जाएगी। हमने सबसे लोकप्रिय विधियों का अध्ययन किया एवं पाया कि अधिकांश “रहस्य” तो मूलभूत ही हैं, एवं मुख्य सिद्धांतों को कुछ ही मिनटों में समझ लिया जा सकता है。
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लेख के मुख्य बिंदु:
- अतिरिक्त सामान हटाने में 80% सफलता उचित प्रेरणा से ही प्राप्त होती है, तकनीक से नहीं;
- सभी विधियों का मुख्य सिद्धांत है: “क्या यह वस्तु आपको खुशी देती है?”;
- अतिरिक्त सामान को वर्गों के आधार पर ही हटाया जाना चाहिए, कमरों के आधार पर नहीं;
- सबसे पहले स्पष्ट रूप से अनुपयोगी सामान हटा दें, फिर संदेहास्पद वस्तुओं पर कार्रवाई करें;
- चीजों से भावनात्मक लगाव ही मुख्य बाधा है।
- अधिकांश लोग डर के कारण ही अनुपयोगी चीजें अपने पास रखते हैं… “कहीं बाद में इसकी आवश्यकता पड़ जाए…”। यही डर उन्हें स्पष्ट रूप से अनुपयोगी सामान हटाने से भी रोकता है।
- दूसरी मनोवैज्ञानिक बाधा है “पछतावा”… “मैंने तो पैसे खर्च किए, अब इसे कैसे फेंक दूँ?”
- तीसरी बाधा है “नostalgia”… हर चीज से कोई ना कोई याद जुड़ी होती है… लेकिन ऐसी यादें तो मन में ही रहती हैं, अलमारी में नहीं।
- **सच्ची खुशी के उदाहरण:** पसंदीदा मग, आरामदायक गोल्फ़ तकिया, ऐसी सुंदर पोशाक जिसे आप अक्सर पहनते हैं… **झूठे लगाव के उदाहरण:** महंगे जूते जिन्हें आप कभी भी इस्तेमाल नहीं करते, पुस्तकें जिन्हें आप दोबारा पढ़ते ही नहीं हैं, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जिनका कोई उपयोग नहीं है…
- **स्तर 1 – स्पष्ट रूप से अनुपयोगी सामान:** टूटी हुई वस्तुएँ, खाली डिब्बे, पुराने रसीदें, समाप्त हो चुका कॉस्मेटिक/दवाई… ऐसी चीजें आसानी से ही फेंक दें; इनसे कोई भावनात्मक लगाव नहीं होता। **स्तर 2 – कपड़े:** सबसे पहले अंदरूनी कपड़े एवं मोजे हटाएँ… फिर बाहरी कपड़े, जूते… अंत में समारोहों के लिए पहने जाने वाले कपड़े। **स्तर 3 – पुस्तकें:** पाठ्यपुस्तकें, संदर्भ ग्रंथ, ऐसी पुस्तकें जिन्हें आप दोबारा पढ़ने की योजना नहीं बना रहे हैं… केवल उन्हीं पुस्तकों को अपने पास रखें जिन्हें आप वाकई पसंद करते हैं। **स्तर 4 – दस्तावेज़:** पुराने बिल, ऐसी मैनुअल जो अब आपके पास उपलब्ध ही नहीं हैं, समाप्त हो चुके दस्तावेज़… **स्तर 5 – अन्य वस्तुएँ:** सीडी, चार्जर, कॉस्मेटिक उत्पाद, रसोई के बर्तन… **स्तर 6 – यादगार वस्तुएँ:** फोटो, उपहार, स्मृतिचिन्ह… ऐसी चीजें आखिर में ही हटाई जानी चाहिए… जब आपको पहले से ही निर्णय लेने का अनुभव हो चुका हो।
- **बॉक्स 1 – ‘रखें’:** ऐसी वस्तुएँ जिनकी आपको वाकई आवश्यकता है, एवं जो आपको खुशी देती हैं। **बॉक्स 2 – ‘फेंक दें/बेच दें/दूसरों को दे दें’:** ऐसी वस्तुएँ जिनकी आपको बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। **बॉक्स 3 – ‘निश्चित नहीं’:** ऐसी वस्तुएँ जिनके बारे में आपको फैसला नहीं हो पा रहा है…
- उन्हें किसी भी कीमत पर बेच दें;
- किसी ऐसे व्यक्ति को दे दें जिसको उनकी आवश्यकता हो;
- उनका कुछ अन्य उपयोग करें;
- बिना किसी पछतावे ही फेंक दें।
- **लालच:** “शायद इसकी कोई उपयोगिता हो…” **भय:** “अगर मैं इसे फेंक दूँ, तो मुझे पैसों की कमी हो जाएगी…” **परफेक्शनिज्म:** “मैं तो इसका कोई सही उपयोग ढूँढ ही लूँगा…”







