‘अविटो’ पर सोवियत फर्नीचर: कैसे बेकार सामान में से कीमती वस्तुएँ चुनें?

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विशेष सलाह: उसी चीज़ को खरीदें जो आपको वाकई पसंद है एवं जिसका उपयोग आप अपने घर में करने के लिए तैयार हैं。

"पहले इसे सिर्फ ‘दूसरे हाथ की फर्नीचर’ कहा जाता था, अब इसे ‘विंटेज’ कहा जाता है," हँसते हुए अनास्तासिया रोमाश्केविच कहती हैं… वह AD मैगज़ीन की पूर्व मुख्य संपादक हैं, एवं “Romashkovyj sbor” नामक टेलीग्राम चैनल की भी लेखिका हैं। हमारी बातचीत में हमने सोवियत फर्नीचर के प्रति लोगों की दिलचस्पी के बारे में बात की… क्यों ऐसा हुआ? एक पीढ़ी, जो IKEA के फर्नीचर से पली-बढ़ी, अचानक ‘पतले पैर वाली कुर्सियाँ’ खरीदने लगी… एवं सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैसे अत्यधिक कीमत वाली वस्तुओं से बचा जाए, एवं केवल ऐसी ही वस्तुएँ खरीदी जाएँ जो वास्तव में मूल्यवान हों."

**लेख के मुख्य बिंदु:**

  • सोवियत फर्नीचर की लोकप्रियता, “मध्य-शताब्दी के आधुनिक डिज़ाइन” ट्रेंड का ही हिस्सा है;
  • विक्रेताओं ने अपनी वस्तुओं के मूल्य को समझ लिया, इसलिए कीमतें भी बढ़ गईं… “तीन कोपेक युग” समाप्त हो चुका है;
  • सबसे मूल्यवान वस्तुएँ पूर्वी जर्मनी, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया से आई आधुनिकतावादी फर्नीचर, एवं उच्च-गुणवत्ता वाली सोवियत वस्तुएँ हैं;
  • मुख्य चयन मापदंड: पहचानने योग्य डिज़ाइन, गुणवत्तापूर्ण सामग्री, अच्छी हालत… या मरम्मत की संभावना;
  • **बचें:** 1980 के दशक की फर्नीचर, सोवियत प्लास्टिक की कुर्सियाँ, भारी “वॉल यूनिट्स”, एवं खराब हालत वाली वस्तुएँ。

**“क्यों सभी लोग सोवियत डिज़ाइन के प्रति दिलचस्पी रखते हैं?”**

“यह केवल रूस ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा एक ट्रेंड है,“ अनास्तासिया रोमाश्केविच कहती हैं… इसके पीछे कई कारण हैं:

  • पहले तो “मध्य-शताब्दी का आधुनिक डिज़ाइन” ट्रेंड लंबे समय से चल रहा है… एवं बार-बार चरम पर पहुँचता है… क्रुश्चेव युग के अपार्टमेंटों में मौजूद फर्नीचर – पतले पैर वाली कुर्सियाँ, छोटी मेज़ें, साइडबोर्ड… सभी ही आधुनिकतावादी डिज़ाइन के उदाहरण हैं;

    • दूसरे, लोग “त्वरित उपभोग” से थक चुके हैं… एवं कुछ ऐसा ढूँढ रहे हैं जो दीर्घकालिक उपयोग में आ सके… 50-60 साल पुरानी सोवियत फर्नीचर तो अपनी टिकाऊपन का प्रमाण है ही;

      • तीसरे, सोशल मीडिया जैसे Pinterest ने लोगों को प्रेरणा दी… एवं महामारी ने भी लोगों को घर की सजावट पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित किया;

      **“कचरे से लेकर संग्रहणीय वस्तुओं तक…”**

      “मेरे दोस्त, जिन्हें हमेशा से सोवियत फर्नीचर में रुचि थी… कहते हैं कि पहले इसे “दूसरे हाथ की फर्नीचर” कहा जाता था, अब इसे “विंटेज” कहा जाता है…“ विक्रेताओं ने भी समझ लिया कि उनके पास तो सिर्फ “कचरा” ही नहीं, बल्कि मूल्यवान वस्तुएँ हैं… इसलिए उन्होंने उनकी कीमतें भी उचित रखी…”

      **“पहले तो ऐसी कुर्सियाँ मुफ्त में ही मिल जाती थीं… अब विंटेज कुर्सियों की कीमत 20-40 हजार रूबल है… लेकिन फिर भी ये नए, मशहूर ब्रांडों की फर्नीचरों से कहीँ सस्ती हैं…”**

      **“साथ ही, ‘ग्रे मार्केट’ भी विकसित हो रहा है… कुछ ऐसी फर्नीचरें तो यूरोपीय बाज़ारों से ही मिल रही हैं…”**

      **“चयन के लिए मुख्य मापदंड क्या हैं?”**

      • **“युग महत्वपूर्ण है…“ 1950-60 के दशक की फर्नीचरें सबसे मूल्यवान हैं… क्योंकि उस समय सोवियत डिज़ाइन आधुनिकतावादी सिद्धांतों पर आधारित था…“**
        • **“पहचानने योग्य डिज़ाइन…“ ऐसी ही फर्नीचरें सोवियत पत्रिकाओं में दर्शाई गई हैं… छोटी मेज़ें, हल्की कुर्सियाँ, साइडबोर्ड…“**
          • **“गुणवत्तापूर्ण सामग्री…“ सोवियत फर्नीचर अक्सर मजबूत लकड़ी या उच्च-गुणवत्ता वाले पार्टिकल बोर्ड से बना होता है… जाँच जरूर करें कि लकड़ी में दरारें तो नहीं हैं, एवं जोड़ों की स्थिति ठीक है या नहीं…**
            • **“हालत या मरम्मत की संभावना…“ पुराने फर्नीचरों को दोबारा साफ-सुथरा किया जा सकता है… इसके लिए कई ट्यूटोरियल उपलब्ध हैं…**
            • **“कौन-सी वस्तुएँ खरीदने से बचें?”**

              • **“1980 के दशक की फर्नीचर… प्लास्टिक की कुर्सियाँ… भारी “वॉल यूनिट्स”…“**
                • **“सोवियत प्लास्टिक की कुर्सियाँ…“ खाने की मेज़ पर रखने के लिए तो ये सबसे उपयुक्त हैं… लेकिन घर के अंदर इनका उपयोग करना आरामदायक नहीं है…**
                  • **“पूरी दीवार पर फैले “वॉल यूनिट्स”…“ ऐसी चीज़ें तो कभी भी घर में न रखें…**
                    • **“बहुत ही खराब हालत वाली फर्नीचरें…“ मरम्मत करने पर भी उनकी कीमत नई वस्तुओं के बराबर नहीं होगी…**
                    • **“कहाँ से एवं कितने में खरीदें?”**

                      • **“‘Avito’ जैसी वेबसाइटें…“ यहाँ फर्नीचरों की तस्वीरें देखकर ही खरीद सकते हैं… विक्रेता से हालत, आकार एवं मरम्मत की संभावना के बारे में जरूर पूछ लें…**
                        • **“फ्ली मार्केट…“ यहाँ भी कई मूल्यवान वस्तुएँ मिल सकती हैं… लेकिन अब ऐसे विक्रेता कम होते जा रहे हैं…**
                          • **“विशेष स्टोर…“ यहाँ पहले से ही मरम्मत की गई फर्नीचरें उपलब्ध हैं… लेकिन कीमतें थोड़ी अधिक हो सकती हैं…**
                            • **“रिश्तेदारों से वस्तुएँ मिल सकती हैं…“ डाचा या दादी के घर से पुरानी फर्नीचरें भी उपयोग में लाई जा सकती हैं…**
                            • **“विंटेज कुर्सियों की कीमत 20-30 हजार रूबल से शुरू होती है… मेज़ें, साइडबोर्ड आदि 15-25 हजार रूबल में उपलब्ध हैं… अनूठी या डिज़ाइनर वस्तुएँ तो 100 हजार रूबल से भी अधिक में मिल सकती हैं…**

                              **“प्रामाणिकता एवं मूल्य कैसे जाँचें?”**

                              • **“फर्नीचर पर लगे निशानों को देखें…“ पूर्वी जर्मनी, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया से आई फर्नीचरों पर कभी-कभी कारखाने के निशान भी होते हैं…**
                                • **“विवरणों पर ध्यान दें…“ उस दौर की फर्नीचरों में अक्सर आरामदायक डिज़ाइन, बेहतरीन संरचना, एवं उच्च-गुणवत्ता वाले हार्डवेयर होते हैं…**
                                  • **“आकारों की जाँच करें…“ आधुनिकतावादी फर्नीचरों में संतुलित आकार होते हैं… ये हल्के एवं सुंदर दिखते हैं…**
                                    • **“मरम्मत की संभावना भी जाँचें…“ पुरानी फर्नीचरों को आसानी से दोबारा साफ-सुथरा किया जा सकता है…**
                                    • **“मरम्मत कैसे करें?”**

                                      **“ऑनलाइन उपलब्ध ट्यूटोरियलों की मदद से आप खुद ही कई फर्नीचरों की मरम्मत कर सकते हैं…“**

                                      **“कौन-सी कार्य विशेषज्ञों पर ही सौपें?”**

                                      **“लकड़ी पर लगे वेनियर की मरम्मत, जटिल लक्षणों वाली फर्नीचरों की मरम्मत…“**

                                      **“सोवियत डिज़ाइन से अत्यधिक दूर तो न जाएँ…“**

                                      **“क्यों? क्योंकि हमें तो अपनी पसंद के अनुसार ही जीने का अधिकार है…“**

                                      **“लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत तो जरूर रखें…“**

                                      • **“सब कुछ एक ही समय में न खरीदें…“ एक-दो गुणवत्तापूर्ण वस्तुएँ ही बेहतर होंगी…**
                                        • **“परिस्थिति को ध्यान में रखें…“ आधुनिक अपार्टमेंटों में सोवियत फर्नीचर उचित नहीं लगेंगे…**
                                          • **“आधुनिक वस्तुओं के साथ मिलाकर ही इनका उपयोग करें…“ पूरी तरह से “सोवियत” डिज़ाइन वाले घर तो म्यूज़ियम जैसे ही दिखेंगे…**
                                            • **“कार्यक्षमता पर भी ध्यान दें…“ सोवियत फर्नीचर तो केवल दिखने में ही नहीं, बल्कि उपयोग में भी आसान हैं…**
                                            • **“फोटो: freepik.com”**

                                              ****“निवेश की संभावना…”**

                                              **“क्या सोवियत फर्नीचर एक अच्छा निवेश है?“ अनास्तासिया रोमाश्केविच सावधानी से कहती हैं… “अच्छा डिज़ाइन वाली फर्नीचरें ही लाभदायक होंगी…“**

                                              **“लेकिन सभी ऐसी फर्नीचरें ही मूल्यवान नहीं हैं… केवल उच्च-गुणवत्ता वाली, एवं इतिहास रखने वाली ही फर्नीचरें मूल्यवान होंगी…“**

                                              **“लेकिन सभी ऐसी फर्नीचरें महंगी भी होंगी… इसलिए पहले ही अपनी ज़रूरतों का ध्यान से आकलन कर लें…“**

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