जहाज एवं टॉवर: 70-80 के दशक में बनाए गए सबसे असामान्य घर (Ships and Towers: The Most Unusual Houses Built in the 1970s-1980s) - REMONTNIK.PRO

जहाज एवं टॉवर: 70-80 के दशक में बनाए गए सबसे असामान्य घर (Ships and Towers: The Most Unusual Houses Built in the 1970s-1980s)

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ये घर किसी ऐसे युग के साक्षी हैं, जब सोवियत वास्तुकारों ने भविष्य के बारे में सपने देखे एवं उन सपनों को कंक्रीट एवं काँच के माध्यम से साकार कर दिया।

कल्पना कीजिए कि आप किसी सामान्य सड़क पर चल रहे हैं, और अचानक आपको ऐसा घर दिखाई देता है जो जहाज की तरह दिखता है एवं अंतरिक्ष में रवाना होने के लिए तैयार है… या ऐसी बिल्डिंग जो लगती है कि सीधे धरती से ही उगी है। क्या यह साइंस-फिक्शन जैसा लगता है? लेकिन यह 70-80 के दशक की सोवियत आर्किटेक्चर की वास्तविकता है… उस समय आर्किटेक्टों ने तय कर लिया था कि साधारण, एकजैसी इमारतें उनके लिए नहीं हैं!

लेख के मुख्य बिंदु:

  • 70-80 के दशक के आर्किटेक्टों ने सामान्य पैनलों के बजाय जहाज की तरह, मीनारों एवं ‘उड़ने वाले दिस्कों’ जैसी अनोखी इमारतें बनाईं;
  • कई ऐसी अनोखी इमारतें आज भी लोगों के लिए आश्चर्य का कारण हैं;
  • �स समय की प्रयोगात्मक आर्किटेक्चर विधियाँ आज के आधुनिक रुझानों से दशकों पहले ही उपस्थित थीं;
  • रूस में अभी भी कई ऐसी इमारतें मौजूद हैं, एवं ये सच्चे ‘शहरी किंवदंतियाँ’ बन गई हैं;
  • उस समय इन अनोखी इमारतों में रहना न केवल प्रतिष्ठित था, बल्कि तकनीकी रूप से भी अत्याधुनिक था。

“जब आर्किटेक्टों ने ‘साधारण इमारतों’ के खिलाफ विद्रोह किया…”

70 के दशक में सोवियत आर्किटेक्टों के मन में कुछ नया विचार आया… उन्हें समान पैनलों, मानक डिज़ाइनों एवं रोजमर्रा की नीरसता से ऊब हो गया था… उन्होंने कुछ “अंतरिक्षीय” एवं अनोखा बनाने का फैसला किया… चूँकि अब लोग अंतरिक्ष में जा सकते हैं, तो उनके घर भी ऐसे ही होने चाहिए!

“जहाज की आकार वाली इमारतें… धरती पर भी ‘यात्रा’ संभव है…”

आर्किटेक्टों को खासकर समुद्री थीम बहुत पसंद थी… मॉस्को की वातुतिना स्ट्रीट पर स्थित यह जहाज-आकार वाला घर अभी भी ऐसा ही लगता है, मानो यह किसी ही पल रवाना होने वाला हो… इसके डिज़ाइनरों ने क्रूज़ जहाजों से प्रेरणा ली… लंबी दीवारें, बालकनियाँ… एवं ऊपरी मंजिल पर “कप्तान का मस्तिष्क” भी… इस घर में रहने वालों का कहना है कि “समुद्री यात्रा” का अनुभव घर पर भी महसूस होता है!

Photo from mos.ru

मॉस्को की वातुतिना स्ट्रीट पर स्थित जहाज-आकार वाला घर

“ऐसी मीनारें जो आसमान को छूती हैं…”

अगर जहाज स्थानीय यात्राओं का प्रतीक हैं, तो मीनारें “ऊर्ध्वाधर यात्राओं” का प्रतीक हैं… येकाटेरिनबर्ग की प्रसिद्ध “सफेद मीनार” शहर का ही प्रतीक बन गई है… इसका गोलाकार आकार एवं सफेद दीवारें ऐसा अहसास दिलाती हैं, मानो यह इमारत सीधे धरती से ही उगी हो!

Photo from commons.m.wikimedia.org

येकाटेरिनबर्ग की “सफेद मीनार”

“ज्यामिति… एक नई ‘रहस्यमय शक्ति’…”

70-80 के दशक में आर्किटेक्चर में ज्यामिति का बहुत अधिक उपयोग हुआ… त्रिभुजाकार इमारतें, पिरामिड, बहुगोल… सब कुछ इसी शैली में बनाया गया… झेलेनोग्राद में तो “अकॉर्डियन-जैसी” आकार वाली इमारत भी बनाई गई!

Photo from pinterest.com

झेलेनोग्राद में “अकॉर्डियन-जैसी” आकार वाली इमारत

“भविष्य की तकनीकें… अतीत में ही उपलब्ध…”

ऐसे अनोखे आकार केवल शुरुआती उदाहरण थे… 70-80 के दशक के आर्किटेक्टों ने कई ऐसी प्रौद्योगिकीय नवाचार भी अपनाए… जो आज सामान्य हो चुके हैं… केंद्रीय एयर-कंडीशनिंग, पनपुँजीय कचरा-निकासी प्रणालियाँ, प्रोग्रामेबल लिफ्ट… सब कुछ उस समय ही इन प्रयोगात्मक इमारतों में शामिल कर दिया गया।

“ऐसी अनोखी इमारतों में रहने का अनुभव कैसा होता है?”

रोमांस तो रोमांस ही है… लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में कई चुनौतियाँ भी होती हैं… अनोखे आकार वाली इमारतों में रहने वाले लोगों का कहना है कि सुंदर डिज़ाइन के कारण फर्नीचर रखना मुश्किल होता है, पैनोरामिक खिड़कियों के कारण ऊष्मा-बिजली का खर्च बढ़ जाता है, एवं गैर-मानक डिज़ाइनों के कारण मरम्मत करना भी कठिन हो जाता है…

लेकिन ऐसी इमारतों में रहने वाले लोग तो बहुत ही रचनात्मक एवं प्रयोग-प्रिय होते हैं… “हमारे जहाज-आकार वाले घर में कलाकार, संगीतकार एवं लेखक भी रहते हैं,“ मॉस्को की वातुतिना स्ट्रीट पर स्थित इमारत में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा… “लगता है कि आर्किटेक्चर ही ऐसे रचनात्मक लोगों को आकर्षित करता है…”

“हम अक्सर इस ‘विरासत’ को नजरअंदाज कर देते हैं…“

70-80 के दशक के कई ऐसे आर्किटेक्चरल प्रयोग आज “स्मारक” के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं, एवं सरकार द्वारा संरक्षित भी हैं… लेकिन सभी नहीं… कुछ अनोखी इमारतें तो ध्वस्त कर दी गईं, या मरम्मत कर ली गईं… लेकिन ये सभी इमारतें उस दौर की गवाह हैं… जब सोवियत आर्किटेक्टों ने भविष्य के बारे में सपने देखे, एवं उन सपनों को काँच एवं पत्थर में जीवंत कर दिया…

आजकल के आर्किटेक्ट अक्सर इसी “विरासत” से प्रेरणा लेते हैं… उनके डिज़ाइनों में 70-80 के दशक की अनोखी विधियाँ ही दिखाई देती हैं… ऐसा लगता है कि उस समय की इमारतें केवल प्रयोग ही नहीं, बल्कि “भविष्य के वास्तविक रूप” भी थीं…

जब आप शहर में घूम रहे हों, तो अनोखी इमारतों पर ध्यान दें… शायद आपके बगल में ही कोई ऐसा “वास्तुकला-कृतिमान” मौजूद हो… जो आपको किसी ऐसे युग में ले जाएगा, जहाँ आर्किटेक्टों को सपने देखने एवं असंभव को संभव बनाने में कोई हिचकिचाहट नहीं थी… कौन जानता है… शायद कुछ दशकों में ऐसी इमारतें सामान्य ही हो जाएँ…

कवर-फोटो: pinterest.com

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