आंतरिक रोशनी: हर कमरे में मूड का जादू

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अंधेरा, जैसे कोई गुफा… या रोशनी, जैसे कोई ऑपरेटिंग रूम? गलत प्रकार की रोशनी सबसे सुनियोजित इंटीरियर को भी बर्बाद कर सकती है। आइए, सही रोशनी-व्यवस्था के रहस्य जानें, और अपने घर को एक आरामदायक स्थान बना लें।

मुख्य बिंदु:

  • बहु-स्तरीय रोशनी ही एक आरामदायक वातावरण की नींव है;
  • �राम के लिए गर्म रोशनी, काम के लिए ठंडी रोशनी;
  • एलईडी बल्ब ऊर्जा एवं पैसे दोनों बचाते हैं;
  • स्मार्ट लाइटिंग एक ऐसी ट्रेंड है जो आगे भी बनी रहेगी;
  • रोशनी का प्रभाव केवल इंटीरियर पर ही नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ता है。

इंटीरियर डिज़ाइनर एल्मीरा वागापोवा कहती हैं: “इंटीरियर डिज़ाइन में रोशनी की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है। सही ढंग से व्यवस्थित रोशनी से घर में अलग-अलग वातावरण बनाए जा सकते हैं… रोशनी एवं छाया का संयोजन जादुई ढंग से स्थान को बदल देता है।”

आइए, पहले रोशनी के प्रकारों के बारे में जानते हैं: सामान्य रोशनी, स्थानीय रोशनी, एवं विशेष प्रकार की रोशनी।

अपने घर के हर कमरे में इस बात का ध्यान रखें कि कहाँ सामान्य रोशनी की आवश्यकता है…

  • कमरे के ऊपरी हिस्से में एकसमान रूप से लाइटिंग फिक्स्चर लगाएं – यही सामान्य रोशनी है;
  • कार्य क्षेत्रों पर स्थानीय रोशनी लगाएं;
  • �राम के क्षेत्रों में वॉल स्कॉन्स, फ्लोर लैम्प आदि इस्तेमाल करें。

“एक्सेंट लाइटिंग” से कमरे की सजावट में महत्वपूर्ण विवरण उभरकर आते हैं – नक्शे, शेल्फ, पेंटिंग, दर्पण आदि।

**लिविंग रूम: आकर्षण का केंद्र** यहाँ हम आराम करते हैं, बातचीत करते हैं, एवं फिल्में देखते हैं… इसलिए सामान्य रोशनी ही आवश्यक है。

**कौन-सी लाइटिंग उपकरण इस्तेमाल करें?**

  • मुख्य भाग में चैंडलियर – सामान्य रोशनी हेतु;
  • वॉल स्कॉन्स या टेबल लैम्प – आरामदायक क्षेत्र बनाने हेतु;
  • स्पॉटलाइट – पेंटिंग/शेल्फों पर प्रकाश डालने हेतु。
  • **एक उपयोगी सुझाव:** डिमर का उपयोग करें… इससे रोशनी की तीव्रता समायोजित की जा सकती है, एवं उचित माहौल बनाया जा सकता है。

    एल्मीरा कहती हैं: “लिविंग रूम, डाइनिंग एरिया… ये सभी आराम, मनोरंजन एवं सामाजिक बातचीत हेतु हैं… कौन-सी लाइटिंग उपकरण इस्तेमाल करें?**

    • मुख्य भाग में चैंडलियर – सामान्य रोशनी हेतु;
    • सुइटिंग लैम्प – भोजन के टेबल/कॉफी टेबल पर प्रकाश डालने हेतु;
    • स्पॉटलाइट – विशेष क्षेत्रों पर प्रकाश डालने हेतु。
    • **डिज़ाइन:** मैक्स झुकोव एवं विक्टर शेफ़ान

      **डिज़ाइन:** दारिया वासिल्योवा एवं “आर्ट ग्रुप”

      **बेडरूम: शांति का क्षेत्र** यहाँ ऐसी रोशनी होनी चाहिए जो आराम दे…

      **तीन प्रकार की लाइटिंग:**

      • �पर से आने वाली मृदु रोशनी (जैसे, कपड़े से बना चैंडलियर);
      • �ेड के पास वाले वॉल स्कॉन्स/टेबल लैम्प;
      • सजावटी लाइटिंग (जैसे, स्ट्रिंग लाइट्स, एलईडी स्ट्रिप्स)。
      • **महत्वपूर्ण:** ऐसे लैम्प ही चुनें जो गर्म रोशनी प्रदान करें (2700–3000 किलोकल्विन)… ऐसी लाइटें मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा नहीं पहुँचातीं, एवं स्वस्थ नींद में मदद करती हैं。

        **डिज़ाइन:** ब्रेनस्टॉर्म ब्यूरो

        **ऑफिस: ध्यान केंद्रित करने हेतु…** यहाँ ऐसी रोशनी होनी चाहिए जो आंखों पर बोझ न डाले।

        **आवश्यक लाइटिंग उपकरण:**

        • �त पर लगी लाइट – ठंडी रोशनी (4000–5000 किलोकल्विन);
        • डेस्क लैम्प;
        • पढ़ने हेतु अतिरिक्त लाइट स्रोत।
        • **एक उपयोगी टिप:** ऐसे लैम्प ही चुनें जिनका रंग-तापमान समायोज्य हो… दिन में ठंडी रोशनी, रात में गर्म रोशनी।

          **डिज़ाइन:** स्वेतलाना ओलेंबर्ग

          **हॉल: पहला इम्प्रेशन…** अक्सर लोग हॉल की ओर ध्यान ही नहीं देते… लेकिन यही पहला ऐसा स्थान है जहाँ मेहमान पहले पहुँचते हैं।

          **आवश्यक लाइटिंग:**

          • हॉल में छिपी हुई लाइटिंग फिक्स्चर;
          • दीवारों पर लगे स्कॉन्स – कमरे को अधिक विशाल दिखाने हेतु;
          • वार्ड्रोब/दर्पणों पर लाइटिंग।
          • **एक उपयोगी सुझाव:** मोशन सेंसर का उपयोग करें… यह न केवल सुविधाजनक है, बल्कि बिजली भी बचाता है।

            **डिज़ाइन:** अन्ना झिज़हायकिना

            **स्मार्ट लाइटिंग: भविष्य यहीं है…** स्मार्ट होम सिस्टमों के द्वारा आप स्मार्टफोन या आवाज़ के माध्यम से लाइटिंग को नियंत्रित कर सकते हैं।

            **लाभ:**

            • �क ही बटन से विभिन्न प्रकार की लाइटिंग सेट कर सकते हैं;
            • <િ>छुट्टी पर भी “मौजूद” दिखने हेतु ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं;
            • ऊर्जा भी बच सकते हैं।

              **महत्वपूर्ण:** सिस्टम चुनते समय यह सुनिश्चित करें कि वह आपके उपकरणों के साथ संगत हो।

              **रोशनी एवं स्वास्थ्य: एक अदृश्य संबंध…** सही प्रकार की रोशनी का हमारे स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।

              **तथ्य:**

              • रात में नीली रोशनी हमारे दिनचर्या-चक्र को प्रभावित करती है;
              • प्राकृतिक रोशनी की कमी डिप्रेशन का कारण बन सकती है;
              • फ्लिकरिंग लाइटें आंखों पर दबाव डालती हैं, एवं सिरदर्द भी पैदा कर सकती हैं。
              • **समाधान:** ऐसे लैम्प ही चुनें जिनकी फ्लिकरन्स आवृत्ति 100 हर्ट्ज से अधिक हो, एवं रंग-तापमान भी समायोज्य हो。

                **निष्कर्ष:** क्या लाइटिंग वास्तव में इतनी ही जटिल है? लाइटिंग को सही ढंग से व्यवस्थित करना तो सरल ही है… मुख्य बात यह है कि प्रत्येक कमरे में उसके उपयोग के अनुसार उचित प्रकार की लाइटिंग ही चुनें। प्रयोग करने से डरें नहीं… रोशनी, वातावरण बनाने में एक शक्तिशाली साधन है… इसका उपयोग करके देखें… आपका घर कैसे बदल जाएगा! **याद रखें:** सही लाइटिंग कोई विलास नहीं, बल्कि आवश्यकता है… यह हमारे मूड, स्वास्थ्य, एवं प्रदर्शन को प्रभावित करती है… लाइटिंग पर थोड़ा समय जरूर खर्च करें… आपका घर तो केवल रहने की जगह ही नहीं, बल्कि ऊर्जा एवं आराम का स्रोत भी बन जाएगा।**

                **कवर डिज़ाइन:** कॉन्स्टेंटिन कोलेसोव प्रोजेक्ट

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