**स्कैंडिनेवियन सफाई विधि: व्यस्त माताओं के लिए एक कार्यशील प्रणाली**
एक स्वच्छ एवं तनावमुक्त घर, सुसंगत जीवन की शुरुआत है。
क्या आप पिंटरेस्ट पर दिखने वाले उन शानदार स्कैंडिनेवियाई इंटीरियरों को याद करते हैं? सफेद दीवारें, न्यूनतम सामान, बिल्कुल साफ-सुथरा माहौल… देखकर लगता है कि “क्या उनके बच्चे भी होंगे?” लेकिन हाँ, उनके भी बहुत सारे बच्चे हैं! स्कैंडिनेवियाई लोगों ने बहुत पहले ही एक ऐसी सफाई प्रणाली विकसित कर ली, जिसकी मदद से तीन बच्चों और पूर्णकालिक नौकरी के बावजूद भी घर साफ-सुथरा रहता है。
यह विधि दुनिया भर की व्यस्त माताओं के बीच काफी लोकप्रिय होती जा रही है… और इसका कोई अच्छा कारण भी है – इसके द्वारा प्रतिदिन सिर्फ 15 मिनट ही सफाई में लगाए जा सकते हैं, जबकि पहले तो सप्ताहांतों में ही तीन घंटे लग जाते थे… और आपका घर हमेशा ही मेहमानों के लिए तैयार रहता है!
स्कैंडिनेवियाई पद्धति का मूल सिद्धांत – “लागोम” है। “लागोम” एक स्वीडिश शब्द है, जिसका अर्थ है “ठीक उतना ही”, “पर्याप्त”。 सफाई के संदर्भ में, इसका मतलब है – पूरी तरह से शुद्ध नहीं, लेकिन ऐसा साफ-सुथरा माहौल जो आराम से रहने के लिए पर्याप्त हो। स्कैंडिनेवियाई लोग शुद्धता की कोशिश नहीं करते… उनका लक्ष्य सिर्फ “कार्यात्मक स्वच्छता” है… आप बिना जूतों के घर में घूम सकते हैं, खाना पका सकते हैं, और दोस्तों को भी बुला सकते हैं… यही पर्याप्त है!
सप्ताहांतों में लंबी समय तक सफाई करने की जरूरत नहीं… स्कैंडिनेवियाई प्रणाली के अनुसार, प्रतिदिन सिर्फ 10-15 मिनट ही काफी हैं… और आपका घर हमेशा ही साफ-सुथरा रहेगा!
**नियम #1:** प्रत्येक दिन केवल एक ही कमरे की सफाई की जाए। स्कैंडिनेवियाई लोग कभी भी पूरा घर एक साथ साफ नहीं करते… हर दिन केवल एक ही कमरे की सफाई की जाती है। उदाहरण: - **सोमवार:** रसोई… बर्तन धोना, सतहें पोंछना, डिशवॉशर में डालना… अधिकतम 10 मिनट। - **मंगलवार:** बाथरूम… सिंक, दर्पण, फर्श पोंछना, तौलिये बदलना… और 10 मिनट। - **बुधवार:** लिविंग रूम… सामानों को उनकी जगह पर रखना, सोफे पर झाड़ू लगाना, धूल हटाना… 15 मिनट। इसी तरह, हफ्ते के अंत तक पूरा घर साफ हो जाएगा… लेकिन सभी कार्य समान रूप से बाँटकर किए जाएंगे।
**नियम #2:** प्रत्येक सामान को अधिकतम तीन बार ही छुआ जाए… पहली बार इसका उपयोग करने के लिए, दूसरी बार इसे वापस अपनी जगह पर रखने के लिए, तीसरी बार इसे धोने या साफ करने के लिए। उदाहरण: स्वेटर उतारकर तुरंत अलमारी में रख दें… नहीं तो “बाद में” के लिए कुर्सी पर रख दें… ऐसा करने से समय की बचत होती है। बच्चों को भी इस नियम को तीन साल की उम्र से ही सिखाया जाता है… खेलने के बाद खिलौना वापस अपनी जगह पर रख दें; कप इस्तेमाल करने के बाद डिशवॉशर में डाल दें।
**नियम #3:** “न्यूनतमवाद” ही स्वच्छता का आधार है… स्कैंडिनेवियाई लोग कम से कम सामान ही रखते हैं… इसलिए उन्हें सफाई में भी कम ही समय लगता है। हर वसंत और शरद ऋतु में, वे अपने घर की जाँच-पड़ताल करते हैं… छह महीने से अधिक समय तक इस्तेमाल न हुए सामानों को दान कर दिया जाता है, बेच दिया जाता है, या फेंक दिया जाता है। बच्चों के कमरों में भी यही नियम लागू है… एक नया खिलौना खरीदने पर, पुराना खिलौना तुरंत फेंक दिया जाता है… ताकि सामानों की संख्या समान ही रहे।
**नियम #4:** प्रत्येक सामान की अपनी ही जगह होती है… परिवार का हर सदस्य इसे जानता है… कैंची – मेज की सही अलमारी में; चाबियाँ – दरवाजे के पास रखी गई टोकरी में; बच्चों के मोजे – अलमारी की दूसरी अलमारी में… नया सामान तभी ही घर में लाया जाए, जब उसके लिए पहले से ही जगह निर्धारित कर ली जाए… अगर जगह न हो, तो मत खरीदें। यह नियम छोटे-से छोटे सामानों पर भी लागू होता है… हेयरक्लिप्स के लिए अलग डिब्बा, पेन के लिए अलग कप…
**15 मिनट की दैनिक रूटीन:** स्कैंडिनेवियाई माताएँ प्रतिदिन सिर्फ 15 मिनट ही सफाई में लगाती हैं… - **सुबह (5 मिनट):** बिस्तर ठीक करना; बर्तन धोना; रसोई की सतहें पोंछना। - **शाम (10 मिनट):** सामानों को उनकी जगह पर रखना; कल के लिए कपड़े तैयार करना; एक कमरे की सफाई करना। बस इतना ही… और आपका घर हमेशा ही साफ-सुथरा रहेगा।
**बच्चों को भी सफाई में शामिल करना:** स्कैंडिनेवियाई बच्चे 2 साल की उम्र से ही सफाई में मदद करने लगते हैं… डरकर नहीं, बल्कि मजे-मजे में। - **2-3 साल:** खिलौनों को टोकरियों में रखना; अपनी प्लेटें सिंक के पास रखना। - **4-5 साल:** बिस्तर ठीक करना; पौधों में पानी डालना; जानवरों को खाना देना। - **6 साल से अधिक:** पूरी तरह से सफाई में शामिल होना… प्रत्येक का अपना कार्यक्षेत्र होता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर परिणाम ठीक न हो, तो भी बच्चों को डाँटना नहीं चाहिए… बच्चों द्वारा गलत तरीके से बनाया गया बिस्तर, माँ द्वारा सही तरीके से बनाए गए बिस्तर से भी बेहतर होगा…
**वीडियो देखें:** “माताओं के लिए स्कैंडिनेवियाई जीवन-शैली सुझाव” **“‘यात्रा’ में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के लिए टोकरी…”** सीढ़ियों के पास एक सुंदर टोकरी रखें… जो भी वस्तुएँ ऊपर ले जानी हैं, उन्हें उसी टोकरी में रख दें… ऊपर जाते समय वही टोकरी ले जाएँ। **“घर के ‘मुख्य स्थल’…”** ऐसी 3-4 जगहें चिन्हित करें, जहाँ सामान अक्सर इकट्ठा हो जाता है… हर दिन उन जगहों की सफाई करें। **“10 मिनट का टाइमर…”** म्यूजिक चलाएँ और 10 मिनट का टाइमर सेट कर दें… पूरा परिवार मिलकर 10 मिनट तक सफाई करे। **“‘एक ही बार में सब कुछ करने’ का नियम…”** कोई भी चीज उठाकर तुरंत ही उसका निपटारा कर लें… कभी भी काम को टालें नहीं।
**सफाई के लिए जो सामान उपयोग में आते हैं…** स्कैंडिनेवियाई लोग सफाई के लिए भी न्यूनतम सामान ही इस्तेमाल करते हैं… - **आवश्यक सामान:** - सामान्य सफाई के लिए कीटनाशक; - माइक्रोफाइबर के कपड़े; - वैक्यूम क्लीनर या झाड़ू; - पोंछने हेतु मोप। - **प्राकृतिक सामान:** - बेकिंग सोडा; - सिरका; - नींबू… **“दर्जनों बोतलों की आवश्यकता नहीं…”** सादगी ही प्रभावशीलता की कुंजी है।
**मौसम के हिसाब से गहरी सफाई…** साल में दो बार – वसंत और शरद ऋतु में – स्कैंडिनेवियाई लोग अपने घर की गहरी सफाई करते हैं… लेकिन यह पूरा कार्यक्रम सप्ताहांत में नहीं, बल्कि एक महीने तक धीरे-धीरे किया जाता है… प्रतिदिन सिर्फ एक ही छोटा कार्य किया जाता है… **“महीने के अंत तक…”** आपका घर पूरी तरह से साफ हो जाएगा… लेकिन किसी को भी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।
**स्कैंडिनेवियाई व्यवस्था की मनोवैज्ञानिक व्याख्या…** स्कैंडिनेवियाई लोगों के लिए सफाई कोई दंड नहीं, बल्कि आत्म-देखभाल है… एक साफ-सुथरा घर = शांत मन। वे परिवार के सदस्यों से मदद लेने में हिचकिचते नहीं… घरेलू कार्य सभी की साझा जिम्मेदारी है, किसी एक व्यक्ति पर नहीं। वे परफेक्शन की कोशिश नहीं करते… “पर्याप्त साफ-सुथरापन” ही उनका लक्ष्य है… ऐसा करने से तनाव कम होता है एवं समय भी बचता है।
**डिज़ाइन:** नीना क्ल्यूस
**यह पद्धति रूसी परिस्थितियों में कैसे लागू हो सकती है…** रूस में तो प्रति परिवार के पास अधिक जगह होती है… इसलिए यह पद्धति और भी अच्छी तरह से काम करेगी। - **सर्दियों में समायोजन:** रेडिएटरों की वजह से हवा सूखी रहती है… इसलिए प्रतिदिन ही फर्श पोंछना पड़ता है; दरवाजे के पास जूतों की सफाई भी करनी पड़ती है। - **ग्रामीण इलाकों में:** कुछ घरेलू कार्य ग्रीष्मकाल में डचा में ही किए जाते हैं… शहरी अपार्टमेंटों में कार्य और भी कम हो जाते हैं।
**महीने बाद का परिणाम…** स्कैंडिनेवियाई पद्धति का अनुसरण करने के बाद: - सफाई में लगने वाला समय काफी हद तक कम हो जाता है; - घर हमेशा ही मेहमानों के लिए तैयार रहता है; - बच्चे स्वतः ही आदत डाल लेते हैं; - “अस्त-व्यस्तता” के कारण होने वाला तनाव कम हो जाता है। **“मुख्य बात यह है… इस पद्धति को अपनाने में आराम से शुरुआत करें…”** पहले दो हफ्तों में तो थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी… लेकिन बाद में यह आदत ही बन जाएगी। **“सफलता का रहस्य…”** यह पद्धति इसलिए काम करती है, क्योंकि यह वास्तविकता पर आधारित है… कोई भी माँ 15 मिनट हर दिन निकाल सकती है… और परिणाम? एक साफ-सुथरा घर, बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के! **“इस पद्धति को एक हफ्ते के लिए आजमाकर देखें…”** कई माँओं को कुछ ही दिनों में ही स्पष्ट फर्क दिखने लगता है… और वे पुरानी तरीकों की ओर वापस नहीं जाना चाहतीं! **“‘लागोम’ सिर्फ सफाई ही नहीं… बल्कि हर चीज में संतुलन है…”** एक साफ-सुथरा घर, तनाव रहित जीवन… यही तो एक सुसंतुलित जीवन की शुरुआत है! **“कवर डिज़ाइन:** नीना क्ल्यूस**
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