बाल्कनी को ऑफिस के रूप में उपयोग करना: महज 3 वर्ग मीटर के स्थान को पूरी तरह कार्यक्षम कार्यस्थल में बदलना

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एक सोच-समझकर किए गए उपाय से, यहाँ तक कि सबसे संकीर्ण बालकनी भी एक आरामदायक कार्यस्थल में परिवर्तित की जा सकती है。

दूरस्थ कार्य प्रणाली ने बालकनी को कपड़े सुखाने की जगह से अपार्टमेंट में सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक बना दिया है। तीन वर्ग मीटर की जगह को यदि सही तरीके से व्यवस्थित किया जाए, तो वह एक पूरी तरह कार्यात्मक कार्यालय में बदल सकती है, जहाँ से शहर का नजारा भी दिख सकता है। इसके लिए ऊष्मा, प्रकाश एवं कार्यक्षमता संबंधी मुद्दों पर ध्यान देना आवश्यक है।

बालकनी पर कार्यालय रखने के कई फायदे हैं – प्राकृतिक रोशनी, घरेलू शोर से दूरी, एवं ‘घर से दूर’ काम करने का अहसास। सही तरीके से व्यवस्थित किए गए बालकनी में भले ही वह बहुत छोटा हो, फिर भी वह एक आरामदायक कार्यस्थल बन सकता है।

लेख में दिए गए मुख्य बिंदु:

  • सर्दियों में भी बालकनी का उपयोग करने हेतु इसे ठीक से इन्सुलेट करना आवश्यक है।
  • �ेस्क को खिड़की के समानांतर रखना चाहिए ताकि प्रकाश ठीक से मिल सके।
  • बालकनी पर विद्युत उपकरण लगाने हेतु पेशेवर की मदद आवश्यक है, क्योंकि नमी से उन्हें नुकसान हो सकता है।
  • दस्तावेजों को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहाँ तापमान में उतार-चढ़ाव न हो।
  • कार्यस्थल एवं आराम क्षेत्र को अलग-अलग जगहों पर रखना चाहिए।

**इन्सुलेशन एवं शीशे:** आराम की नींव बिना उचित इन्सुलेशन के बालकनी पर कार्य करना मुश्किल होगा। शीशे, दीवारें, फर्श एवं छत को इन्सुलेट करना आवश्यक है। - **शीशे:** गर्म डबल-ग्लाज या ऊर्जा-बचत वाले शीशे उपयुक्त हैं। - **फर्श:** पॉलिस्टीरीन या मिनरल वूल से इन्सुलेट करना चाहिए। - **दीवारें:** 5-10 सेमी मोटी पॉलिस्टीरीन/मिनरल वूल से इन्सुलेट करना आवश्यक है।

**विद्युत उपकरण:** सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है बालकनी पर कंप्यूटर, लाइटिंग एवं हीटर जैसे उपकरण आवश्यक हैं। इनकी स्थापना पेशेवर द्वारा ही करानी चाहिए। - **आउटलेट:** बालकनी पर IP44 या उससे अधिक सुरक्षा वाले आउटलेट ही उपयोग करें। - **सॉकेट:** बहुत से सॉकेट आवश्यक होंगे – कंप्यूटर, मॉनिटर, प्रिंटर आदि के लिए। - **स्विच:** प्रवेश द्वार पर एवं कार्यस्थल के पास स्विच रखें।

**कार्यस्थल की व्यवस्था:** डेस्क, बालकनी पर कार्य करने हेतु सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका आकार बालकनी की चौड़ाई पर निर्भर करता है, लेकिन कम से कम 100×60 सेमी आकार का डेस्क होना आवश्यक है। - **स्थान:** डेस्क को खिड़की के समानांतर रखें, ताकि प्रकाश ठीक से मिल सके। - **ऊँचाई:** डेस्क की ऊँचाई 72-75 सेमी होनी चाहिए। - **अतिरिक्त सामान:** दस्तावेजों, कागजातों आदि के लिए बंद दराजे या अलमारियाँ उपयुक्त हैं।

**कार्य हेतु प्रकाश:** सुबह, शाम या बादलों वाले दिनों में बालकनी से प्राप्त प्राकृतिक रोशनी कम हो सकती है, इसलिए कृत्रिम प्रकाश की आवश्यकता होती है। - **मुख्य प्रकाश:** छत पर लगे लाइट फिक्स्चर या स्पॉटलाइट। - **कार्य हेतु प्रकाश:** डेस्क के पास लाइट लगाएं, ताकि प्रकाश आँखों पर न पड़े। - **सजावटी प्रकाश:** शेल्फों के नीचे या मॉनिटर के पीछे LED स्ट्रिप लगाएं।

**जलवायु नियंत्रण:** सर्दियों में हीटर आवश्यक है। पावर बैकअप उपकरण भी उपयोगी होगा। गर्मियों में एयर कंडीशनर या पंखा उपयोग में लाएं।

**कार्यक्षमता एवं आराम:** कुर्सी, डेस्क के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। ऊँचाई एवं आकार ऐसा होना चाहिए कि कुर्सी पीठ को सही तरीके से सपोर्ट कर सके। पैरों के लिए भी उचित सहायता आवश्यक है।

**सूर्य की रोशनी से सुरक्षा:** ब्राइट सूर्य की रोशनी कंप्यूटर पर काम करने में बाधा पहुँचा सकती है, इसलिए छात्रियाँ/शीशे आवश्यक हैं।

**सजावट:** सुंदर दृश्य, चित्र, पौधे आदि कार्यस्थल को और भी आकर्षक बना सकते हैं।

**अन्य तकनीकी सुझाव:** इंटरनेट की गुणवत्ता बालकनी पर कम हो सकती है; इसलिए वाई-फाई रिपीटर या अतिरिक्त एक्सेस पॉइंट उपयोग में लाएँ।

**बजट के हिसाब से समाधान:** IKEA की डेस्क एवं अन्य सामान उपयोग में लाए जा सकते हैं।

**कानूनी मुद्दे:** बालकनी पर इन्सुलेशन लगाने से पहले संपत्ति प्रबंधन कंपनी से अनुमति लें।

**निष्कर्ष:** तीन वर्ग मीटर की जगह को सही तरीके से व्यवस्थित करके एक पूरी तरह कार्यात्मक कार्यालय बनाया जा सकता है।

**कवर:** डायना वेलेवा का डिज़ाइन प्रोजेक्ट

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