वैक्यूम क्लीनरों के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य जो आपको पहले से नहीं पता है…

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वैक्यूम क्लीनर हमेशा से आजकल जितने हल्के एवं सुरक्षित नहीं रहे हैं। हम आपको बताते हैं कि पहले ऐसे सफाई उपकरण कैसे विकसित हुए, एवं पाँच शताब्दियों में इनमें क्या-क्या बदलाव आए।

कई शताब्दियों से लोग घर की सफाई को आसान बनाने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, ब्रश एवं कपड़ों से लुव्रे जैसी इमारतों की सफाई में कई दिन लग जाते थे; इसलिए ऐसी इमारतें बहुत ही कम सफाई हो पाती थीं। 16वीं शताब्दी के अंत तक एवं 17वीं शताब्दी की शुरुआत में लुव्रे तो कचरे का ढेर हो गया था। इसलिए ही आधुनिक वैक्यूम क्लीनर का पहला प्रोटोटाइप फ्रांस में ही बना।

पेरिस में एक धातुकर्मी एटियन लार ने कार्डिनल माज़ारिन को एक ऐसा उपकरण सुझाया, जिससे कम समय में कमरों की सफाई हो सके। यह एक लंबी, भारी पाइप थी, जिसमें पाँच डोरी लगी हुई थीं; इन डोरियों के कारण पाइप के अंदर एक स्क्रू घूमता रहता था। हालाँकि, यह उपकरण कोई खास सफलता नहीं हासिल कर पाया।

**पहले वैक्यूम क्लीनर** 1860 में अमेरिका में वैक्यूम क्लीनर संबंधी पहला पेटेंट जारी हुआ। आयोवा के डैनियल हेस ने इस उपकरण में घूमने वाला ब्रश एवं एक जटिल प्रणाली शामिल की, ताकि हवा की धारा उत्पन्न हो सके। हालाँकि, इस उपकरण का कभी भी व्यावसायिक उपयोग नहीं हुआ।

**एवु मैकगैफनी एवं अन्य** 1869 में एवु मैकगैफनी को वैक्यूम क्लीनर संबंधी पेटेंट मिला; इस उपकरण में एक विशेष हैंडल था, जिसे लगातार दबाना पड़ता था। यह उपकरण हल्का एवं कॉम्पैक्ट था, लेकिन इसे चलाना थोड़ा मुश्किल था।

**जॉन टॉर्मी का पेटेंट** 1899 में जॉन टॉर्मी को पेट्रोल चालित वैक्यूम क्लीनर संबंधी पेटेंट मिला। हालाँकि, इस उपकरण का भी कोई खास व्यावसायिक सफलता नहीं हुई।

**हर्बर्ट सेसिल बट की उपलब्धि** ब्रिटिश आविष्कारक हर्बर्ट सेसिल बट ने घर की सफाई को एक पूरा शो में बदल दिया। उन्होंने ऐसा वैक्यूम क्लीनर बनाया, जो कारपेट एवं कुर्सियों से धूल को तेजी से चूस लेता था। ग्राहक बट की कंपनी से इस उपकरण को 3–5 पाउंड में किराये पर लेकर अपने घरों में सफाई करा सकते थे; यह उपकरण घोड़ों पर ही घर तक पहुँचाया जाता था।

**1905 में पोर्टेबल वैक्यूम क्लीनर** 1905 में वॉल्टर ग्रिफिथ्स ने हल्के, पोर्टेबल वैक्यूम क्लीनर संबंधी पेटेंट जारी किया; यह उपकरण आधुनिक मॉडलों के समान ही था।

**अमेरिकी मानक** लगभग इसी समय, विलियम हूवर की चमड़े की फैक्ट्री में काम करने वाले मरे स्पेंगलर ने बट के उपकरण का इलेक्ट्रिक संस्करण तैयार किया। हूवर ने इस पेटेंट को खरीद लिया; उनके मॉडल 20 किलोग्राम वजनी थे, एवं इनमें पैरों से चलने वाले ब्रश भी शामिल थे।

**यूरोपीय संस्करण** 1910 में स्वीडिश उद्यमी एक्सेल वेनर-ग्रेन ने “सांटो” नामक वैक्यूम क्लीनर बनाया; यह उपकरण आज भी उपयोग में है।

**रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर** 2002 में पहला रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर बाजार में आया; उपभोक्ता इसे खुद भी खरीद सकते थे।

**आज के विकास** आजकल बाजार में कई प्रकार के वैक्यूम क्लीनर उपलब्ध हैं; ये हल्के, कॉम्पैक्ट हैं, एवं आसानी से साफ किए जा सकते हैं। ये न केवल सतहों को, बल्कि हवा को भी साफ करते हैं, एवं गिरी हुई तरल पदार्थों को भी इकट्ठा कर लेते हैं। निर्माता ऐसी प्रणालियाँ विकसित कर रहे हैं, जो एलर्जी एवं अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए आसानी पैदा करें।

**उदाहरण:** थॉमस कंपनी का DryBOX Amfibia नामक वैक्यूम क्लीनर, दो सबसे आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणालियों – DryBOX (सूखी सफाई हेतु) एवं AquaBOX (गीली सफाई हेतु) – से लैस है; यह 99.99% धूल एवं 100% परागकणों को इकट्ठा कर देता है।

**अतिरिक्त सुविधाएँ:** AquaBOX Amfibia की मदद से नरम फर्नीचर, कारपेट एवं मैट्रेस की गीली सफाई भी की जा सकती है; पार्केट फर्शों की सफाई हेतु Aqua Stealth एड-ऑन उपकरण भी उपलब्ध है।