इंटुइटिव ईटिंग या कैलोरी गिनती: आखिरकार कौन-सी विधि काम करती है?

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याद रखें: आपका लक्ष्य ऐसी तरह खाना खाना है जिससे आप स्वस्थ, ऊर्जावान रहें एवं अपने शरीर से संतुष्ट महसूस करें。

फोटो: freepik.com सेआर्टिकल के मुख्य निष्कर्ष:

  • कैलोरी गिनती तेज़ी से वजन कम करने में प्रभावी है, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल है;
  • “सहज भोजन” सभी के लिए उपयुक्त नहीं है… इसके लिए कुछ विशेष कौशल एवं मानसिक तैयारी आवश्यक है;
  • अधिकांश लोगों के लिए “मिश्रित दृष्टिकोण” सर्वोत्तम है… यानी कैलोरी पर नियंत्रण रखते हुए भूख के संकेतों पर ध्यान देना;
  • किसी भी विधि की सफलता आपकी खान-पान की आदतों में बदलाव की इच्छा पर ही निर्भर करती है, न कि विधि के आपने आप में;
  • 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को हार्मोनल परिवर्तनों के कारण “सहज भोजन” विधि पर निर्भर रहना मुश्किल हो सकता है।
**कैलोरी गिनती: गणित या भूख?**

**वास्तविक अनुभव: तीन महीने तक कड़ी कैलोरी गिनती**

**“सहज भोजन”: प्रकृति पर विश्वास**

  • शारीरिक एवं भावनात्मक भूख में अंतर करें;
  • धीरे-धीरे एवं सचेतन रूप से खाएँ;
  • पेट भरने पर तुरंत खाना बंद कर दें;
  • किसी खाद्य पदार्थ को “अच्छा” या “बुरा” न ठहराएँ;
  • अपने खाद्य पदार्थों का आनंद लें।
  • **क्यों सहज अनुमान गलत हो सकते हैं?**

    **“सहज भोजन” का प्रयास करें…**

    **कौन-सी विधि किसके लिए उपयुक्त है?**

  • जो लोग नियंत्रण एवं योजनाबद्धता पसंद करते हैं;
  • जिनकी “संतृप्ति” समझ पहले से ही बिगड़ चुकी है;
  • एथलीट, जिन्हें सटीक पोषण की आवश्यकता होती है।

  • जो लोग नए कौशल सीखने में दिलचस्पी रखते हैं;
  • जिन्हें खान-पान संबंधी विकार हुए हैं;
  • जो परिणामों की गति से अधिक मनोवैज्ञानिक संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं।

    **“संयुक्त दृष्टिकोण”: दोनों विधियों का सही संतुलन**

    **“सहज भोजन” के कुछ चुनौतीपूर्ण पहलू…**

      “शरीर की आवाज़ सुनना“ – हमेशा सही नहीं होता… कभी-कभी मीठे खाद्य पदार्थों की लालसा तनाव का ही संकेत हो सकती है;
        **“सामाजिक दबाव“ – जब सभी लोग डाइट पर हों, तो “सहज रूप से खाना“ मुश्किल हो जाता है…
          **“हार्मोनल परिवर्तन“ – महिलाओं की भूख, उनके मासिक चक्र के कारण अक्सर बदलती रहती है… इसलिए “शरीर की आवाज़ सुनना“ मुश्किल हो जाता है…
        **कैलोरी गिनती कब खतरनाक हो सकती है?**

        **अगर आप “कैलोरी गिनती” करने का फैसला करें, तो:**

      • पहले ही मामूली प्रतिबंध लगाएँ… कैलोरियों को अचानक बहुत कम न करें; “चीट दिवस“ तय करें… ऐसे दिन जब आप कैलोरियाँ गिनें ही नहीं; भोजन की मात्रा का अनुमान देखकर ही तय करें; धीरे-धीरे “मुक्त रूप से खाना“ शुरू करें।

    • पहले एक ही भोजन को “सहज रूप से“ खाएँ; अपनी भूख का डायरी में रिकॉर्ड रखें; धीरे-धीरे, बिना फोन/टीवी के ही खाएँ; तेज़ परिणामों की अपेक्षा न करें… कौशल सीखने में कुछ महीने लगते हैं।

      **“सही विधि“ के बारे में सच्चाई…**

      लक्ष्य “जीवनभर कैलोरियाँ गिनते रहना“ या “पूरी तरह से अपनी इंद्रियों पर भरोसा करना“ नहीं है… बल्कि यह है कि आप ऐसी खान-पान की आदतें विकसित करें, जिससे आप स्वस्थ रहें… ऊर्जावान रहें… एवं अपने शरीर से संतुष्ट महसूस करें।

      **फीचर छवि: freepik.com से**

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