5 ऐसी आंतरिक रुझानें जो अब पुरानी होती जा रही हैं…
अगर कोई लोकप्रिय समाधान आपके लिए उपयुक्त न हो, तो उसे छोड़ने में डरें नहीं।
कुछ ऐसे आंतरिक डिज़ाइन ट्रेंड हैं जो कभी ताज़े एवं स्टाइलिश लगते थे, लेकिन अब तो लगभग हर अपार्टमेंट में देखने को मिलते हैं। जब आप किसी के घर जाते हैं, तो वही पुराना दृश्य देखने को मिलता है – सलेटी रंग की दीवारें, स्कैंडिनेवियन शैली की आभूषण, नियॉन लाइटिंग। ऐसा लगता है जैसे सभी लोग एक ही दुकान से फर्नीचर खरीदते हैं एवं एक ही डिज़ाइनर की मदद लेते हैं… अब समय आ गया है कि हम यह स्वीकार करें कि कुछ ट्रेंड अपना काम पूरा कर चुके हैं, इन्हें बदलने की आवश्यकता है。
**ट्रेंड #1: सलेटी रंग** सलेटी रंग की दीवारें, सोफे, कुशन, एवं अन्य आभूषण… पिछले पाँच वर्षों से रूसी अपार्टमेंटों में यह रंग तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है।
- शुरुआत में तो सलेटी रंग एक सार्वभौमिक विकल्प लगता था… यह किसी भी शैली के साथ मेल खाता है, एवं आधुनिक दिखाई देता है। लेकिन समय के साथ ऐसे इंटीरियर एक जैसे एवं उबाऊ लगने लगे।
- मुख्य समस्या यह है कि सलेटी रंग प्राकृतिक रोशनी को अवशोषित कर लेता है… ऐसे में कम ही रोशनी वाले कमरों में यह रंग उदास एवं निराशाजनक वातावरण पैदा करता है।
- साथ ही, सस्ते सलेटी रंग के फर्नीचर/पेंट भी खराब दिखाई देते हैं… जबकि अच्छी क्वालिटी की सामग्री महंगी होती है।
**इसकी जगह क्या लेना चाहिए:** गर्म, उदासीन रंग – बेज, क्रीम, मिल्क… या साहसी विकल्प जैसे टेराकोटा, जैतूनी, धूलदार गुलाबी।
**ट्रेंड #2: स्कैंडिनेवियन मिनिमलिज्म** सफेद दीवारें, हल्का लकड़ी के फर्नीचर, कम से कम सजावट… स्कैंडिनेवियन शैली को अक्सर “अच्छे स्वाद” का प्रतीक माना गया है।
- लेकिन यह शैली खास मौसमी परिस्थितियों के लिए ही बनाई गई थी… स्कैंडिनेविया में तो कम ही रोशनी होती है, इसलिए सफेद रंग उस कमी को पूरा करता है… लेकिन रूस में यह शैली अनुपयुक्त लगने लगी।
- स्कैंडिनेवियन मिनिमलिज्म के लिए महंगी, गुणवत्तापूर्ण सामग्रियों की आवश्यकता होती है… सस्ती नकलें तो खाली एवं ठंडी दिखाई देती हैं।
- इस शैली का एक और नुकसान यह है कि सफेद सतहों की लगातार देखभाल आवश्यक होती है… बच्चों वाले परिवारों में ऐसे इंटीरियर परेशानी का कारण बन सकते हैं।
**इसकी जगह क्या लेना चाहिए:** “गर्म, प्राकृतिक सामग्रियों” पर आधारित शैली… जैसे जापानी “वाबी-साबी” शैली, या मॉडर्न क्लासिकिज्म।
**ट्रेंड #3: ईंट की दीवारें** कुछ साल पहले तो ईंट की दीवारें ही “स्टाइलिश इंटीरियर” का प्रतीक मानी जाती थीं… अब तो ये क्रुश्चेवका अपार्टमेंटों में भी देखने को मिलती हैं – पेंटिंग, प्लास्टिक पैनल, या सजावटी पत्थरों के रूप में।
- लेकिन असली ईंट की दीवारें तो केवल ऐतिहासिक इमारतों या पुराने औद्योगिक स्थलों में ही उपयुक्त हैं… आम अपार्टमेंटों में तो ये अनैसर्गिक लगती हैं।
- �ंट की नकलें तो हमेशा ही सस्ती एवं खराब दिखाई देती हैं… खासकर प्लास्टिक पैनल… ये तुरंत ही “सस्ती मरम्मत” का संकेत दे देते हैं।
- ईंट की दीवारें कमरे को छोटा एवं अंधेरा लगाती हैं… छोटे अपार्टमेंटों में यह बहुत ही परेशानी का कारण हो सकता है।
**इसकी जगह क्या लेना चाहिए:** प्राकृतिक लकड़ी, सजावटी प्लास्टर, बनावटी दीवारें, या सुंदर तरीके से रंगीन दीवारें।
**ट्रेंड #4: खुली अलमारियाँ** खुली अलमारियाँ आधुनिक इंटीरियरों का प्रतीक मानी जाती हैं… ये किताबें, पौधे, सजावटी वस्तुएँ आसानी से दिखाती हैं… सिद्धांत रूप में तो यह शैलिष्ट लगता है, लेकिन वास्तव में तो यह परेशानी का कारण बन जाता है…
- खुली अलमारियों की लगातार देखभाल आवश्यक होती है… हर गलत जगह पर रखी गई किताब या धूलदार वस्तु पूरे इंटीरियर को बिगाड़ सकती है।
- खुली अलमारियों पर तेज़ी से धूल जम जाती है… हर हफ्ते कई बार इन वस्तुओं को साफ करना एक परेशानीपूर्ण कार्य है।
- ज्यादातर घरेलू वस्तुएँ तो सुंदर भी नहीं होतीं… इन्हें कहीं रखने की आवश्यकता पड़ती है… खुली अलमारियाँ तो ऐसा करने में असमर्थ हैं।
**इसकी जगह क्या लेना चाहिए:** बंद अलमारियाँ, आकर्षक डिज़ाइन वाले फर्नीचर, या संयोजित समाधान – कुछ अलमारियाँ खुली हों, कुछ बंद।
**ट्रेंड #5: नियॉन लाइटिंग एवं LED लाइटें** “Good vibes only”, “Home sweet home”, “Love”… ऐसे नियॉन संकेत रूसी अपार्टमेंटों में आम हो गए हैं… टीवी के पीछे, बिस्तर के नीचे, या अन्य जगहों पर रंगीन LED लाइटें भी लगाई जा रही हैं।
- लेकिन ऐसी लाइटें जल्द ही परेशानी का कारण बन जाती हैं… जो कभी स्टाइलिश एवं आधुनिक लगती थीं, अब तो उबाऊ एवं परेशान करने वाली हो गई हैं… खासकर रूसी घरों में इंग्लिश भाषा में लिखे संकेत।
- LED लाइटें अक्सर सस्ती एवं नीची क्वालिटी की होती हैं… ऐसी लाइटें नाइटक्लब या किशोरों के गेमिंग रूम जैसी दिखाई देती हैं… आवासीय इंटीरियरों में तो ये उपयुक्त नहीं हैं।
- रंगीन लाइटें मन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं… लगातार बदलते रंग आँखों को परेशान करते हैं, एवं आराम को भी रोक देते हैं।
**इसकी जगह क्या लेना चाहिए:** गुणवत्तापूर्ण, सादे रंगों की लाइटें… सुंदर फ्लोर लैम्प/टेबल लैम्प, मोमबत्तियाँ – ऐसे उपकरण कमरे में आरामदायक वातावरण पैदा करेंगे।
**क्यों ट्रेंड इतनी जल्दी परेशानी का कारण बन जाते हैं?** मुख्य समस्या तो यही है कि आधुनिक इंटीरियर डिज़ाइन लोकप्रियता पर ही आधारित है… सोशल मीडिया के कारण हर कोई “स्टाइलिश” चीजें खरीदना चाहता है… लेकिन परिणाम तो सभी जगह एक ही रहता है – एकरूपता।
- कई ट्रेंड तो रूसी वास्तविकताओं के अनुकूल ही नहीं हैं… स्कैंडिनेवियन मिनिमलिज्म तो खास मौसमी परिस्थितियों के लिए ही बनाया गया था… रूस में तो ऐसी शैली अनुपयुक्त ही है।
- फर्नीचर एवं सामग्रियों के निर्माता भी जल्दी ही ट्रेंडों को अपनाकर सस्ती नकलें बना देते हैं… परिणामस्वरूप “स्टाइलिश” चीजें तो साधारण ही हो गई हैं।
**आगे क्या आएगा?**
- **व्यक्तिगत शैली…** लोग अब समान इंटीरियरों से थक चुके हैं… वे अपनी व्यक्तिगत पसंदों के आधार पर ही घर को सजाना चाहते हैं।
- **प्राकृतिक सामग्रियाँ…** लकड़ी, पत्थर, धातु, प्राकृतिक कपड़े – ऐसी सामग्रियाँ हमेशा ही शैलिष्ट लगती हैं, एवं समय के साथ भी अच्छी दिखती हैं।
- **गर्म रंग…** सलेटी, बेज, टेराकोटा, जैतूनी – ऐसे रंग फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।
- **कार्यक्षमता…** सुंदरता के अलावा, इंटीरियर को तो प्रयोग में आसान होना भी आवश्यक है…
- **गुणवत्ता ही सर्वोपरि है…** दस सस्ती चीजें, एक अच्छी चीज की तुलना में कम ही काम करती हैं… फर्नीचर, सजावट, सभी चीजों में यही बात सच है।
- **एक उदासीन आधार चुनें…** दीवारें, फर्श, बड़े फर्नीचर – ये सभी तो सामान्य ही होने चाहिए… ट्रेंड केवल अतिरिक्त सजावटों के रूप में ही शामिल करें।
- **वही चीजें खरीदें जो आपको वास्तव में पसंद हैं…** अगर कोई ट्रेंड आपके जीवनशैली या स्वभाव के अनुरूप न हो, तो उसे न खरीदें।
- **गुणवत्तापूर्ण सामग्रियों पर ही ध्यान दें…** महंगी होने के बावजूद, अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्रियाँ हमेशा ही अच्छी दिखाई देती हैं।
- **ट्रेंडों का उपयोग संयम से करें…** प्रत्येक कमरे में केवल एक-दो ही “ट्रेंडी” तत्व शामिल करें… इससे इंटीरियर लंबे समय तक स्टाइलिश दिखाई देगा।
- **कार्यक्षमता पर ही ध्यान दें…** सुंदरता तो जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ कमरे को प्रयोग में आसान भी होना चाहिए।
**डिज़ाइन: अन्ना सिदोर्त्सोवा**
**कैसे परेशान करने वाले ट्रेंडों से बचें?**
**वीडियो देखें: “मुख्य नियम”** सबसे स्टाइलिश इंटीरियर वही होता है जो उसके मालिकों की व्यक्तिगतता एवं जीवनशैली को प्रतिबिंबित करता हो… ट्रेंड तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन सच्चा स्वाद तो हमेशा ही बना रहता है…
**अगर कोई ट्रेंड आपके लिए उपयुक्त न हो, तो उसे छोड़ दें…** परेशान करने वाली चीजों के बजाय, एक आरामदायक, सुंदर घर ही सबसे अच्छा विकल्प है…
**कवर: अन्ना सिदोर्त्सोवा का डिज़ाइन प्रोजेक्ट**
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