न तो कोई टॉवर, न ही कोई पाइप… मेल्निकोव का घर मरम्मत के बाद मेहमानों को कैसे आश्चर्यचकित करने वाला है?

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एक अत्यंत साहसी एवं आधुनिक इमारत के उद्भव की कहानी…

मॉस्को के ठीक बीचोबीच एक ऐसी वास्तुशिल्पीय रचना स्थित है, जिसने सदियों से गुजरने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है… दो आपस में जुड़े सिलिंडर, जिन पर खिड़कियाँ लगी हैं, तो मानो किसी फिल्म का सेट हों… और यह सब ऐतिहासिक ‘अरबाट’ क्षेत्र में है। कॉन्स्टेंटिन मेल्निकोव का यह घर… एक प्रतिभाशाली वास्तुकार का सपना… अब व्यापक मरम्मत के दौर से गुजर रहा है… और यह कार्य 2025 के अंत तक पूरा होने वाला है… लेकिन क्या हम इस घर के अंदर जो कुछ भी है, उसके लिए तैयार हैं?

लेख के मुख्य बिंदु:

  • मेल्निकोव के घर की मरम्मत 2025 के अंत तक चलेगी… यह इस इमारत के इतिहास में पहली बार हो रही वैज्ञानिक मरम्मत है;
  • नींद का कमरा पूरी तरह से सुनहरे रंग का था… दीवारें, छत… यहाँ तक कि बिस्तर भी ‘सुनहरी हवा’ में ‘तैरने’ जैसा अनुभव देते थे;
  • इस इमारत में कोई भी सीधा कोण नहीं है… 60 षट्कोणीय खिड़कियाँ बिना किसी छाया के प्रकाश प्रदान करती हैं;
  • मेल्निकोव ने ‘नींद का प्रयोगशाला-कमरा’ बनाया… ऐसा कमरा, जहाँ आदर्श नींद संभव हो;
  • यह इमारत मूल रूप से भविष्य के सामुदायिक घरों का आदर्श मानी गई… लेकिन अपनी तरह में अद्वितीय है。

एक ऐसी वास्तुशिल्पीय क्रांति, जो एक सपने से शुरू हुई…

मेल्निकोव का यह सपना 1916 में शुरू हुआ… उस समय वह एक छात्र थे… पहले उनके नक्शों में पारंपरिक ढाँचे दिखाई देते थे… लेकिन 1920 के दशक में उनके ड्राफ्टों में अजीब-गजीब आकृतियाँ आने लगीं… वह जानते थे कि सामान्य ढाँचा पर्याप्त नहीं होगा…

उनकी रचना में दो एक ही व्यास वाले सिलिंडर शामिल थे… जो आपस में एक-दूसरे के आधे त्रिज्या की दूरी पर जुड़े हुए थे… यही अनोखा ढाँचा अंतिम रूप से तैयार हुआ… मेल्निकोव ने खुद ही इस इमारत का निर्माण किया…

दिलचस्प बात यह है कि ऐसी संरचना का विचार उनकी पहले की असफलता से ही आया… मेल्निकोव ने ‘जुएव क्लब’ के लिए ऐसी ही रचना प्रस्तावित की, लेकिन उस परियोजना को अस्वीकार कर दिया गया… इसलिए उन्होंने अपने ही घर में ऐसी संरचना का उपयोग किया।

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“तनाव, प्रकाश, हवा एवं ऊष्मा की समानता…”

मेल्निकोव का मानना था कि इस इमारत की सबसे खास विशेषता “तनाव, प्रकाश, हवा एवं ऊष्मा की समानता” में है… केवल 18×32 मीटर के क्षेत्र में बनी यह इमारत… अंदर एवं बाहर दोनों ही जगहों पर कोई सीधा कोण नहीं है…

इस इमारत की विशेषताएँ आज भी लोगों को हैरान करती हैं… दीवारें लाल ईंटों से बनी हैं… इन पर खास पैटर्न बनाए गए हैं… ये पैटर्न हर दूसरी पंक्ति में बदल जाते हैं… परिणामस्वरूप बाहरी दीवारों पर लगभग 200 षट्कोणीय खिड़कियाँ बन गईं… इनमें से कुछ तो खिड़कियों के रूप में ही उपयोग में आती हैं, जबकि कुछ अन्य इमारत का ही हिस्सा हैं…

लेकिन सबसे अद्भुत बात तो फर्श है… पारंपरिक बीम एवं कठ्ठे ढाँचों का उपयोग नहीं किया गया… फर्श को लकड़ी की पट्टियों से ही बनाया गया… इन पट्टियों की जोड़ें ऐसी हैं कि फर्श पूरी तरह से सीधा ही बना हुआ है… इसलिए इमारत में बीम या स्तंभों की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।

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“सुनहरा नींद का कमरा… एवं अन्य प्रयोग…”

इस इमारत का सबसे रहस्यमय कमरा तो नींद का कमरा ही था… मेल्निकोव के परिवार के सभी सदस्य इसी कमरे में सोते थे… यहाँ कोई अलमारी या अन्य फर्नीचर नहीं था… केवल तीन ही बिस्तर थे… माता-पिता के लिए एक दोस्ताना बिस्तर, एवं बेटे-बेटी के लिए अलग-अलग बिस्तर…

लेकिन यही नहीं था… पुरानी यादों के अनुसार, इस कमरे का सारा आंतरिक भाग सुनहरे रंग में ही रंगा हुआ था… दीवारें, फर्श, छत… एवं बिस्तर भी सुनहरे रंग के थे… परिवार का कहना है कि सुबह-सुबह यहाँ ‘सुनहरी हवा’ में रहने का अनुभव बहुत ही अद्भुत था…

मेल्निकोव ने वास्तव में एक “नींद का प्रयोगशाला-कमरा” ही बनाया… बिस्तर के पैर, जो फर्श से ही निकलकर आते थे, एवं घर का समग्र ढाँचा, जिसमें गोल-गोल कोने भी शामिल थे… सब कुछ ही प्लास्टर से बनाया गया था… ऊपर से सुनहरे रंग की परत चढ़ाई गई थी… मेल्निकोव का मानना था कि सही तरह से व्यवस्थित जगह ही अच्छी नींद के लिए आवश्यक है…

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“वह कमरा, जहाँ कभी कोई छाया ही नहीं पड़ती थी…”

मेल्निकोव के स्टूडियो में 36 खिड़कियाँ थीं… इनकी वजह से कभी भी कोई छाया ही नहीं पड़ती थी… यह तो कलात्मक कार्यों के लिए एक वास्तविक उपलब्धि ही थी… पूरे दिन एक समान रोशनी… बिना किसी अचानक परिवर्तन के…

मेहमानों के लिए वहाँ खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे… स्टूडियो में 38 षट्कोणीय खिड़कियाँ थीं… हर खिड़की का आकार, स्थान एवं प्रकाश-पड़ाव सभी ही बहुत ही सावधानी से तय किए गए थे…

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“वह घर, जिसके कारण मेल्निकोव का करियर ही खत्म हो गया…”

मेल्निकोव की दुर्भाग्यपूर्ण कहानी यह है कि उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ही उनके करियर के अंत का कारण बन गई… 1930 के दशक में आधुनिक वास्तुकला को नापसंद कर दिया गया… 1930 से 1950 तक मेल्निकोव पर नकारात्मक टिप्पणियाँ ही की जाती रहीं… उनकी सभी इमारतों की आलोचना की गई… खासकर उनके इसी घर की…

आलोचकों ने इस घर को “अमीरी की प्रदशर्नी” एवं “औपचारिकता का प्रतीक” कहा… लेकिन समय ने सब कुछ ही सही जगह पर रख दिया… आज मेल्निकोव का यह घर दुनिया भर के वास्तुकारों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है…

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“मरम्मत… एक जासूसी कहानी की तरह…”

मेल्निकोव के घर की मरम्मत दिसंबर 2023 में शुरू हुई… इसका पूरा कार्य 2025 के अंत तक पूरा होने वाला है… लेकिन यह सिर्फ मरम्मत ही नहीं है… यह तो एक वास्तविक पुरातत्व-अन्वेषण है… इस दौरान यह पता लगाने की कोशिश की गई कि इमारत में कौन-कौन सी चीजें मूल रूप से ही संरक्षित रही हैं… एवं कौन-सी चीजें 1970 एवं 1990 के दशक में हुई मरम्मतों के दौरान बदल गई हैं…

विशेषज्ञों ने पाया कि मेल्निकोव की इस रचना की विशेषताएँ ही इसकी “प्रयोगात्मक प्रकृति” से संबंधित हैं… मेल्निकोव एक प्रणालीकरण का प्रयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे… उनके कुछ तकनीकी समाधान तो विवादास्पद भी थे… लेकिन इसी कारण यह इमारत अद्वितीय है…

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“वह इमारत, जिसने भविष्य का ही पूर्वानुमान कर दिया…”

मेल्निकोव की यह इमारत मूल रूप से “भविष्य के सामुदायिक घरों” का ही आदर्श मानी गई… उनका सपना तो ऐसी इमारतें बनाने का ही था… जिनमें पूरे परिवार एक साथ रह सकें… उनके आर्काइव में ऐसी ही एक और इमारत का नक्शा भी मौजूद है… इसमें तीन सिलिंडर हैं… ऐसे ही पैटर्न से वे पूरे शहरों का निर्माण भी कर सकते थे…

कल्पना कीजिए… अगर मॉस्को में ऐसी ही इमारतें होतीं, तो शहर का चेहरा ही पूरी तरह से बदल जाता… लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं… मेल्निकोव का यह घर ही अपनी तरह में अद्वितीय रहा।

मरम्मत के बाद आगंतुकों के लिए क्या होगा?

म्यूज़ियम के प्रतिनिधियों का कहना है कि मरम्मत पूरी हो जाने के बाद इस इमारत का ऐतिहासिक भाग पुनः संरक्षित कर दिया जाएगा… इमारत में वास्तुकार की रचनाओं की प्रतियाँ भी लगाई जाएंगी… एवं आंगन में इस इमारत के इतिहास से संबंधित जानकारी देने वाले पोस्टर भी लगाए जाएंगे… बगीचे में आगंतुकों के लिए ऑडियो-गाइड भी तैयार किया जाएगा…

इमारत के बाहरी एवं आंतरिक हिस्सों पर व्यापक मरम्मत की जाएगी… मूल ईंटों, खिड़की-कुंजियों… एवं चिमनियों की भी मरम्मत की जाएगी… पुराने ढाँचों को ही उसी रूप में बहाल कर दिया जाएगा… इमारत का रंग-पैटर्न भी पुनः संरक्षित किया जाएगा… बगीचे की डिज़ाइन भी फिर से ठीक की जाएगी…

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“मेल्निकोव का घर… एक सच्ची वास्तुशिल्पीय कृति…”

मेल्निकोव का यह घर तो वास्तव में एक “वास्तुशिल्पीय कृति” ही है… यह ऐसी इमारत है, जो हमें बताती है कि सही ढंग से डिज़ाइन किया गया जगह ही व्यक्ति के जीवन को बेहतर बना सकता है… मेल्निकोव ने अपने सपनों को साकार कर दिखाया… और दुनिया को “साहस” का एक महत्वपूर्ण सबक भी दे दिया…

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