एंड्रेय मिरोनोव घर पर: फ्रांसीसी परफ्यूम, कैटलॉग टाइ, एवं रसोई में होने वाले छोटे-मोटे नाटकीय प्रदर्शन…
हम आपको बताते हैं कि मंच के बाहर वह कैसे था。
वह चुप्पी नहीं सह पाते थे, एकरूपता को बर्दाश्त नहीं कर पाते थे, आधे-रास्ते में रुककर जीना भी उनके लिए संभव नहीं था। घर पर भी, आंद्रेय मिरोनोव एक कलाकार ही रहते थे। हम आपको बताते हैं कि स्टेज के बाहर उनका जीवन कैसा था — अपने पसंदीदा अपार्टमेंट में, दोस्तों, किताबों एवं सुगंधों के बीच।
“जीवन… एक स्टेज ही है… घर पर भी!”
आंद्रेय मिरोनोव केवल स्टेज पर ही अभिनय नहीं करते थे… वे अपना पूरा जीवन ही एक नाटक की तरह जीते थे। घर पर भी… शांति एवं चुप्पी उन्हें परेशान कर देती थी। वे हर परिस्थिति में कुछ ना कुछ करते रहते थे… दोपहर के भोजन के दौरान छोटे-मोटे नाटकीय प्रदर्शन करते थे, रोजमर्रा के कामों को ही एक शो की तरह पेश करते थे, एवं अपने दोस्तों/परिवार के साथ मजाक भी करते रहते थे।
ये सब केवल दूसरों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं था… यही उनकी प्रकृति थी। वे एक सक्रिय, ऊर्जावान व्यक्ति थे… जिनके लिए संचार ही एक कला थी। मिरोनोव के घर में हमेशा ही गतिविधियाँ चलती रहती थीं… कोई ना कोई बातचीत होती रहती थी, लोग मिलते-जुलते रहते थे, मनोरंजन होता रहता था… कोई ना कोई फोन पर बात करता रहता था। वे किसी भी प्रकार की एकांतता या सीमाओं को सहन नहीं कर पाते थे… यहाँ तक कि बाथरूम में भी वे फोन पर बात करते रहते थे, ताकि दुनिया से जुड़े रह सकें।
“बाथरूम में भी फोन… रसोई की मेज पर भी संगति!”
मिरोनोव का घर ही एक ऐसा स्थान था… जहाँ मीटिंगें होती थीं, बातचीतें होती थीं, एवं विचारों का आदान-प्रदान होता रहता था। वे कभी भी खुद को अलग-थलग नहीं करते थे… बल्कि लोगों से ही ऊर्जा प्राप्त करते रहते थे। लगभग हर शाम ही उनके घर में मेहमान आते रहते थे… वे ऐसा वातावरण बनाने में माहिर थे कि हर कोई वहाँ थोड़ी देर तक रुकना चाहता रहता था।
रसोई की मेज पर… देर रात तक बातचीतें… लिविंग रूम में… गाने, मजाक, एवं नाटकों की चर्चा… इन ही दीवारों के बीच रोजमर्रा का जीवन भी एक नाटक की तरह ही प्रतीत होता था… लेकिन बिना किसी नकलीपन के… यह सब गर्म, जीवंत, एवं असली ही था।
“दागिने… शैली… एवं बेहतरीन स्वाद!”
आंद्रेय मिरोनोव केवल अच्छे कपड़े पहनने वाले व्यक्ति ही नहीं थे… बल्कि ऐसे व्यक्ति भी थे, जिन्होंने अपनी खुद की शैली विकसित कर ली थी… वे अपने दागिनों एवं कपड़ों का चयन कलाकार की तरह ही सावधानी से करते थे… रंग, बनावट, एवं मूड… अक्सर वे विदेशी कैटलॉगों से ही कपड़े खरीदते थे… उन्हें पता था कि कोई कपड़ा कैसे फिट होना चाहिए… एवं वे फैशन का भी पालन करते थे… नहीं कि लोगों को पसंद आए… बल्कि क्योंकि वे सौंदर्य-बोध से ही भरपूर व्यक्ति थे।
घर पर भी… वे किसी भी प्रकार की ढिलाई को सहन नहीं करते थे… उनके पास ऐसे कोई बाथरोब भी नहीं थे, जिनकी आस्तीनें लटकी हुई होतीं… वे मानते थे कि अपनी उपस्थिति… एवं अपने आसपास के लोगों के प्रति सम्मान ही है।
“फोटो: culture.ru”
“सुगंध… अपने आपको व्यक्त करने का एक माध्यम!”
मिरोनोव की एक और शौक… फ्रेंच सुगंधें! वे विभिन्न ब्रांडों को जानते थे, नई उत्पादनों की जानकारी रखते थे… मौसम, समय, एवं अपने मूड के हिसाब से ही सुगंधें चुनते थे… उनके लिए सुगंध… कपड़ों का ही एक हिस्सा थी… मानो वह कपड़े की ही एक अतिरिक्त विशेषता हो।
उनके चरित्र की एक और विशेषता… वे अक्सर अपने दोस्तों को सुगंधें उपहार में देते थे… पुरुषों को… तो उनकी शैली के हिसाब से… महिलाओं को… तो हमेशा ही एक छोटी-सी “प्रेमपूर्ण” सुगंध के साथ… वे केवल उपहार देना ही नहीं चाहते थे… बल्कि उस व्यक्ति के लिए एक नई “तस्वीर”, एक नई सुगंध, एवं एक नई कहानी ही बना देते थे।
“ऊर्जा से भरपूर घर!”
मिरोनोव का अपार्टमेंट कोई “संग्रहालय” नहीं था… लेकिन उसमें हर चीज का अपना ही स्थान था… पुराने सामान, ऐतिहासिक आकार की कुर्सियाँ, किताबें, पोस्टर, रिकॉर्ड… एक पूरा आयतन वाला दर्पण… उसी दर्पण में वे अभिनय का अभ्यास करते थे… सही लहजे ढूँढते थे… अपनी हरकतों में सुधार करते रहते थे… घर पर भी… वे एक अभिनेता ही रहते थे… “सच्चे” अर्थ में।
“उनका घर… गर्म, जीवंत… एवं थोड़ा-सा ‘बारोक’ शैली का भी था… मानो एक ऐसा स्टेज हो, जहाँ हर चीज का कोई अर्थ हो…”
“फोटो: ria.ru”
“वे जीवन में केवल अभिनय ही नहीं करते थे… बल्कि पूरा जीवन ही एक नाटक की तरह जीते थे!”
मिरोनोव “उदास” या “साधारण” व्यक्ति नहीं थे… वे कभी भी किसी “सादे जीवनशैली” के पीछे नहीं छिपते थे… वे चमकदार, ध्यान आकर्षित करने वाले, मजेदार… एवं हृदयस्पर्शी व्यक्ति थे… वे अपने आसपास के सभी लोगों को ऊर्जा ही देते रहते थे… एवं कभी भी “थक नहीं पड़ते थे”。
“और जब सब कुछ ही टूट गया… स्टेज… स्वास्थ्य… प्यार… तब भी उनके अंदर वही ‘ऊर्जा’ मौजूद रही…”
“वे केवल जीते ही नहीं थे… बल्कि अपने आसपास के सभी लोगों के लिए “जीवन” ही बना देते थे… असली, स्वादिष्ट… एवं थोड़ा-सा ‘नाटकीय’… लेकिन हमेशा ही “जीवंत”!”
“कवर: kp.ru”
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