एक स्नानगृह बनाना: पेशेवरों से मिली 9 उपयोगी सलाहें

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यह सब योजना बनाने, लकड़ी का चयन करने एवं उचित इन्सुलेशन के बारे में है।

मॉस्को क्षेत्र के गाँव उदिनो में अपनी स्नानगृह परियोजना के आधार पर, डिज़ाइनर अन्ना रागुलीना ने ऐसी जानकारी तैयार की है जो बताती है कि किस तरह से एक स्नानगृह बनाया जा सकता है, ताकि वह स्टाइलिश एवं आरामदायक हो।

**अन्ना रागुलीना – विशेषज्ञ आंतरिक डिज़ाइनर एवं सजावट कारी।**

**1. परियोजना:** सबसे पहले, यह तय करें कि आप अंत में क्या हासिल करना चाहते हैं। सभी कार्यों, अस्थायी एवं अंतिम सामग्रियों एवं उपकरणों का विस्तृत नक्शा बनाएँ। इससे अनपेक्षित पुनर्कार्य एवं अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकेगा。

हमने 35 वर्ग मीटर का स्नानगृह बनाया, जिसमें भाप कक्ष, शॉवर, आराम कक्ष (जिसमें रसोई भी है) एवं बाथरूम शामिल है। पूरी परियोजना को पूरा करने में 6 महीने लगे।

**2. इन्सुलेशन:** भाप कक्ष की दीवारों, फर्श एवं छत पर उचित इन्सुलेशन लागू करें। पॉलीप्रोपिलीन पेनोटर्म एनपीपी एलएफ जैसी सामग्री का उपयोग करें; यह जलरोधी, भापरोधी एवं ऊष्मा-प्रतिरोधी है।

**3. वेंटिलेशन:** भाप कक्ष में उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित करें; इससे भाप ठीक से वितरित होगा। सामान्य वेंटिलेशन से पूरे स्नानगृह का आर्द्रता स्तर नियंत्रित रहेगा।

**4. भाप कक्ष:** भाप कक्ष में उपयोग होने वाला स्टोव, उसका आकार एवं क्षमता न केवल आपकी पसंदों पर, बल्कि इस्तेमाल होने वाले स्टोव की शक्ति पर भी निर्भर करती है। आमतौर पर प्रति घन मीटर 1.5 किलोवाट के स्टोव का ही उपयोग किया जाता है।

हमारे प्रोजेक्ट में ग्राहक ने लकड़ी से बना स्टोव चाहा, जिसमें गैस भी हो। भाप कक्ष बड़ा था, इसलिए हमने “तेप्लोदार साइबेरिया 30” नामक स्टोव का उपयोग किया।

**5. शेल्फ:** तापमान के अंतर के कारण भाप कक्ष में शेल्फ दो या तीन स्तरों पर लगाई जाती हैं; निचली शेल्फ ऊपरी शेल्फ की तुलना में बहुत ठंडी होती है। ऊपरी शेल्फ से छत तक की दूरी कम से कम 1.1 मीटर होनी चाहिए, जबकि निचली शेल्फ की दूरी फर्श से कम से कम 30–40 सेमी होनी चाहिए。

**6. लकड़ी:** स्नानगृह में उच्च गुणवत्ता वाली लकड़ी ही उपयोग करें; जैसे, नींबू की लकड़ी गर्म होने पर सुगंधित होती है एवं काली नहीं होती, जबकि एस्पेन वृक्ष की लकड़ी से कोई रासायनिक पदार्थ निकलता नहीं है। यदि बजट अनुमति देता है, तो ऐश लकड़ी का उपयोग करें; यह अधिकतम तापमान पर भी नहीं गर्म होती, इसलिए बहुत आरामदायक है।

**7. प्रकाश:** भाप कक्ष में ऐसे प्रकाश सामग्री का ही उपयोग करें जो 110°C तक के तापमान को सहन कर सकें। हमने “हार्विया साएएस21060” नामक प्रकाश सामग्री का उपयोग किया।

**8. लकड़ी का उपचार:** स्नानगृह एवं सौना कक्ष में “तिकुरिला सुपी लॉडेसोजा” पैराफिन तेल का ही उपयोग करें; अन्य कक्षों में सामान्य समापन सामग्री ही पर्याप्त होगी।

**9. शॉवर जोन:** शॉवर कक्ष में पर्याप्त संख्या में शॉवर स्टेन्ड, साबुन/शैम्पू रखने हेतु शेल्फ, एरोमाथेरेपी तेल के लिए डिब्बे एवं हैंगर लगाएँ। यदि जगह अनुमति देती है, तो शॉवर उपकरण भी लगाएँ; ध्यान रखें कि पानी की सप्लाई ऊपर ही होती है। इस क्षेत्र में आमतौर पर बाल्टियाँ रखने हेतु एक स्टूल भी होता है।

**10. दरवाजे:** स्नानगृह के दरवाजे सामान्य आंतरिक दरवाजों से अलग होने चाहिए; केवल विशेष दरवाजों ही उपयोग में लाए जाने चाहिए, खासकर ऐसे दरवाजे जिनमें काँच या काँच की प्लेट हो।

हमने “फिनिश डोर्स” कंपनी से बने दरवाजे ही लगाए; इन दरवाजों में इन्सुलेशन लगा है, एवं हिंज एवं स्ट्राइक प्लेटें भी समायोज्य हैं।

**11. आराम कक्ष एवं अन्य क्षेत्र:** आराम कक्ष में लकड़ी से बनी बेंचें, स्टूल एवं कुर्सियाँ ही उपयुक्त होंगी; ऐसी वस्तुएँ न तो गीली होंगी एवं न ही गंदी होंगी।

रसोई छोटी भी हो सकती है; हमारे मामले में, इसमें केवल सिंक, अंतर्निहित फ्रिज एवं लेरॉय मर्लिन से खरीदी गई डिशों हेतु कैबिनेट है; साथ ही, गर्म लाल रंग में रंगी हुई तौलियों एवं कम्बलों के लिए भी जगह है। दीवार के पीछे “डी डाइट्रिच” ब्रांड का बॉयलर लगाया गया है, जो गर्म पानी प्रदान करता है।

**12. अन्य विवरण:** लकड़ी से बनी अलमारियाँ, प्राकृतिक कपड़ों से बनी खिड़कियाँ एवं कुछ छोटे-मोटे सजावटी तत्व भी आवश्यक हैं।

**13. टेरेस:** टेरेस या बरामदे के लिए “लार्च” प्रजाति की लकड़ी ही उपयुक्त है; इसकी लकड़ी मजबूत एवं नमी-प्रतिरोधी होती है। सुंदर रेलिंग, चौड़ी सीढ़ियाँ, फूलों के पौधे, मेज एवं दो कुर्सियाँ टेरेस को और भी सुंदर बना देंगी。

**डिज़ाइन परियोजना:** अन्ना रागुलीना **फोटोग्राफी:** दीना अलेक्सांड्रोवा

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