निजी घर में लिविंग रूम का आंतरिक डिज़ाइन
लिविंग रूम “सभी के लिए उपयोग होने वाला कमरा” है; इसलिए इसे मालिकों के स्वभाव एवं आवश्यकताओं के अनुसार, आरामदायक एवं कार्यात्मक तरीके से सजाना महत्वपूर्ण है。
डिज़ाइनरों की सलाह है कि व्यवस्था तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित होनी चाहिए:
लेआउट तय करें: योजना बनाने के दौरान ही क्षेत्रों का विभाजन एवं दीवारों पर पैटर्न तय कर लें.
उपकरणों एवं सॉकेटों की स्थिति निर्धारित करें.
रोशनी संबंधी योजना बनाएँ; यह तय करें कि सभी रोशनी स्रोत कहाँ होंगे.
इन बिंदुओं के आधार पर आप लिविंग रूम का डिज़ाइन तैयार कर सकते हैं। डिज़ाइन शुरू करते समय सबसे पहले इसकी शैली तय करें, क्योंकि शैली ही फिनिशिंग सामग्री, कपड़ों एवं फर्नीचर का चयन निर्धारित करती है.
निजी घरों में लिविंग रूम के डिज़ाइन हेतु सामान्य शैलियाँ:
रंग संबंधी सुझाव: लिविंग रूम में रंगों का उपयोग संतुलित ढंग से करें; एक ही शैली में रंगों का चयन करें, ताकि इंटीरियर सुसंगत दिखे।
फर्नीचर एवं रोशनी: लिविंग रूम के डिज़ाइन हेतु उपयुक्त आकार एवं सामग्री के फर्नीचर चुनें।
लेआउट संबंधी सुझाव: ‘फर्श – दीवारें – छत’ के विजुअल त्रिकोण में फर्श सबसे गहरे रंग का होना चाहिए, जबकि छत सबसे हल्के रंग की होनी चाहिए; इनके रंगों में केवल 1-2 टोन का अंतर होना चाहिए।
सुझाव: दरवाजों एवं खिड़कियों के आसपास की जगह ‘मृत क्षेत्र’ (dead zone) रखें; जिससे दरवाजे आसानी से खुल सकें। जगह बचाने हेतु शीघ्र दरवाजे या पर्दे लगा सकते हैं。
सुझाव: फर्नीचर के बीच की दूरी कम से कम 50 सेमी होनी चाहिए।
सुझाव: टीवी को ऐसी जगह पर रखें कि दर्शक के सामने खिड़की बाईं या दाईं ओर हो।
डिज़ाइन में सबसे आम गलती अनुचित रोशनी प्रणाली का उपयोग है; इसके कारण दीवारों/फर्नीचर के रंग खराब दिख सकते हैं, एवं कई परेशानियाँ भी हो सकती हैं। इसलिए पहले ही उचित रोशनी व्यवस्था कर लें。
सुझाव: फिनिशिंग एवं ज़ोनिंग के चरण में रोशनी संबंधी योजना ध्यान से बनाएँ; क्योंकि रोशनी डिज़ाइन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक ही कमरे में दो या तीन अलग-अलग ज़ोन बनाने हेतु एक ही रोशनी स्रोत पर्याप्त नहीं होगा; इसलिए अतिरिक्त लाइटिंग उपकरण आवश्यक हैं।
सुझाव: लिविंग रूम में काले-सफ़ेद रंगों का उपयोग करना आकर्षक लगेगा; हालाँकि, एक ही शैली में सभी दीवारों/फर्नीचर पर एक ही रंग का उपयोग न करें; कपड़े, कुशन, रजाई आदि में अलग-अलग रंग शामिल करें।
सुझाव: फर्नीशिंग हेतु सजावटी सामग्रियों जैसे स्टको का उपयोग करें; यह अलग-अलग बनावटें पैदा करने में मदद करती है।
सुझाव: निजी घरों में लिविंग रूम को किचन/डाइनिंग रूम के साथ जोड़ना आम है; ऐसे में आपको विभिन्न तरह की व्यवस्थाएँ करनी पड़ सकती हैं।
सुझाव: लिविंग रूम में फोटो-वॉलपेपर या अन्य डिज़ाइनरी सामग्रियों का उपयोग करके अंदरूनी सजावट करें।
सुझाव: छोटे लिविंग रूमों में बड़े दर्पण लगाने से कमरा अधिक हल्का एवं खुला लगेगा।
सुझाव: अलग-अलग प्रकार की फर्श सामग्रियाँ जैसे लाइनोल, पार्केट आदि भी उपयोग में ला सकते हैं।
सुझाव: बड़े लिविंग रूमों में अलग-अलग क्षेत्र बनाने हेतु आर्क, पृथक दीवारें या अन्य सहायक ढाँचे उपयोग में लाएँ।
सुझाव: फर्नीचर का आकार ऐसा होना चाहिए कि इसका उपयोग आराम से किया जा सके।
सुझाव: लिविंग रूम में नरम फर्नीचर, जैसे सोफा, कुर्सियाँ आदि, आवश्यक हैं।
सुझाव: फर्नीचर की व्यवस्था कमरे की संरचना के अनुसार होनी चाहिए।
सुझाव: दीवारों पर वॉलपेपर लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि सभी वॉलपेपर एक ही शैली एवं रंग के हों; अन्यथा इंटीरियर असंतुलित लगेगा。
सुझाव: दीवारों पर कपड़े या अन्य सजावटी वस्तुएँ ऐसी होनी चाहिए कि आसानी से बदली जा सकें।
सुझाव: लिविंग रूम में प्रकाश की व्यवस्था ध्यान से करें; इस हेतु अतिरिक्त लाइटिंग उपकरण आवश्यक होंगे।
सुझाव: फर्श की सजावट हल्के एवं सुसंतुलित रंगों में करें; ताकि कमरा अधिक आकर्षक लगे।
सुझाव: दीवारों पर फर्नीचर ऐसे लगाएँ कि यह कमरे की संरचना को और अधिक स्पष्ट करे।
सुझाव: लिविंग रूम में प्रकाश की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि सभी क्षेत्रों में समान रूप से पहुँच हो।
वीडियो देखकर लिविंग रूम को किचन के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है, इसकी अधिक जानकारी प्राप्त करें。
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