“पुनर्निर्माण के दौरान हो सकने वाली उन छोटी-मोटी गलतियों के बारे में… जिनके बारे में आप शायद ही याद रखते हों…”
**रसोई:** पहले काउंटरटॉप लगाएं, फिर बैकस्प्लैश।
अक्सर बिल्डर पहले काउंटरटॉप लगाते हैं, फिर बैकस्प्लैश सजाते हैं एवं बेसबोर्ड लगाते हैं। ऐसा करने से कीचड़ा जमना अपरिहार्य हो जाता है। बेहतर होगा कि पहले बैकस्प्लैश लगाएं, फिर जोड़ों पर लचीला ग्राउट लगाएं। एक अन्य विकल्प यह है कि बैकस्प्लैश काँच से बनाया जाए; इससे दीवार एक ही इकाई की तरह दिखेगी एवं कमी भी नहीं होगी।
**डिज़ाइन:** अलेना एवं आर्टेम। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**पूरी रसोई के लिए दो आउटलेट लगाएं:**
अनुभव से पता चला है कि डिज़ाइनर, ग्राहक एवं इलेक्ट्रीशियन भी आउटलेटों की संख्या एवं स्थिति में गलतियाँ कर देते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए पहले ही रोशनी के उपयोग एवं लाइटिंग व्यवस्था की योजना बना लेनी चाहिए।
**उदाहरण:** रसोई में उपयोग होने वाले सभी इलेक्ट्रिक उपकरणों की गिनती करें, उनकी स्थिति तय करें एवं अतिरिक्त तीन आउटलेट भी लगा दें। ऐसा करने से एक्सटेंशन कॉर्ड का उपयोग करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
**डिज़ाइन:** ब्लैकडॉट स्टूडियो। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**स्टोरेज की व्यवस्था ठीक से न बनाना:**
किसी भी अपार्टमेंट में हर वर्ग मीटर का उपयोग आवश्यक रूप से होना चाहिए, खासकर रसोई में। मानक स्टोरेज व्यवस्थाओं के अलावा गैर-मानक विकल्पों पर भी विचार करें।
**उदाहरण:** रसोई के कैबिनेटों के नीचे घर में बनाए गए जैम की बोतलें रख सकते हैं; इसके लिए आसानी से हटाया जा सकने वाली झूलन छत का उपयोग करें। या ऐसे शाडो चुनें जो दीवार से 30 सेंटीमीटर दूर हट सकें। दीवार पर लगी कंडीشनरों के पीछे हुक लगा कर सीढ़ी भी छिपा सकते हैं (यह विकल्प किसी भी कमरे में उपयोगी होगा)।
**डिज़ाइन:** ओल्गा रुबेयकिना। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**कमरे की दीवारों का रंग चुनते समय नमूना न लेना:**
यह सलाह पूरे अपार्टमेंट के लिए ही महत्वपूर्ण है, लेकिन कमरे में तो गुणवत्तापूर्ण नींद आवश्यक है। भले ही आपको लगे कि आपने सही रंग चुन लिया है, लेकिन दीवारों पर वह उतना ही सही दिखेगा यह नहीं कहा जा सकता। रंग का प्रभाव विशेष स्थान की रोशनी, प्रकाश की दिशा आदि पर निर्भर है।
**गलती से बचने के लिए:** पहले कुछ अलग-अलग रंगों के रंग के नमूने (प्रत्येक 200 ग्राम) खरीदें, फिर प्राइम किए गए जिप्सम बोर्ड पर उन रंगों का परीक्षण करें। हर शीट पर रंग का नाम लिखकर दीवार पर लगाएँ।
**डिज़ाइन:** ओल्गा रुबेयकिना। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**नाइटस्टैंड की ऊँचाई को ध्यान में न रखके सोफा के पास आउटलेट लगाना:**
आदर्श स्थिति में, पहले ही सोफा चुन लें, फिर उसकी ऊँचाई के अनुसार आउटलेट एवं स्विच लगाएँ। इससे उन तक आसानी से पहुँचा जा सकेगा। यदि चयन करने में कठिनाई हो, तो स्विच एवं आउटलेट 90 सेंटीमीटर की ऊँचाई पर लगाएँ। इन्हें इंटीरियर में अत्यधिक दिखने से बचाने हेतु लकड़ी या दीवार के रंग जैसे सामान्य रंग ही चुनें।
**डिज़ाइन:** ब्लैकडॉट स्टूडियो। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**बाथरूम में गैर-मानक प्लंबिंग उपकरण चुनना:**
तैयार रहें कि गैर-मानक आकार के प्लंबिंग उपकरणों की वजह से रेनोवेशन में समय एवं बजट दोनों ही अधिक लग सकता है, एवं वे इंटीरियर में भी फिट नहीं हो पाएँगे। चूँकि ऐसे उपकरणों की संख्या हमेशा सीमित रहती है, इसलिए उनके लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है, एवं उनकी कीमत भी अधिक होती है।
**डिज़ाइन:** अनास्तासिया कपाचिंस्किह। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**प्लंबिंग सुविधाओं तक पहुँच की व्यवस्था ठीक से न बनाना:**
प्लंबिंग सुविधाओं तक पहुँच की पैनल शुरुआत से ही सही ढंग से लगाना आवश्यक है; इसमें ऐसा अंतर छोड़ना चाहिए कि आसानी से उसे खोला जा सके। वरना, अनपेक्षित परिस्थितियों में पानी बंद करना मुश्किल हो जाएगा।
**डिज़ाइन:** क्वाड्रम स्टूडियो। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**पहले ही ड्रेन लगाएँ, फिर मिक्सर खरीदें:**
आमतौर पर प्लंबिंग सुविधाओं के लिए मानक आकार का ड्रेन ही उपयोग में आता है; लेकिन यदि किसी परियोजना में बड़ा, असामान्य शावर लगाने की आवश्यकता हो, तो ड्रेन को पहले ही तैयार कर लें। इसमें समय लगेगा एवं बार-बार धूल भी जम जाएगी। इसलिए पहले ही इसकी योजना बना लें।
**डिज़ाइन:** वalerिया वेसेलोवा। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**बाथरूम में अतिरिक्त मिनी सिंक लगाना भूल जाना:**
यदि बाथरूम अलग है, तो टॉयलेट में एक अतिरिक्त मिनी सिंक लगाना सभी के लिए आरामदायक होगा। पहले तो यह स्वच्छता हेतु आवश्यक है, दूसरे इससे बाथरूम भी अधिक कार्यात्मक रूप से उपयोग में आ सकता है।
**डिज़ाइन:** जूलिया बोर्टनेव्स्काया। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**वॉशर की आवश्यकता ही न भूल जाएँ:**
वास्तविक परिस्थितियों में, तीन गर्मियों के सप्ताहों के लिए भी वॉशर आवश्यक है।
**डिज़ाइन:** FAOMI। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**लिविंग रूम में ‘पास-थ्रु स्विच’ न लगाना:**
लिविंग रूम में पहले से ही योजनाबद्ध रोशनी व्यवस्था होना आवश्यक है। ‘पास-थ्रु स्विच’ के कारण आप अलग-अलग जगहों से लाइटें चालू/बंद कर सकते हैं। या यदि आप शाम में पुस्तकें पढ़ना पसंद करते हैं, तो दीवार पर ऐसा स्विच लगाएँ जो आपकी बाहु की पहुँच में हो।
**डिज़ाइन:** दारिया शापोश्निकोवा। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**लाइटों एवं पेड़ के लिए आउटलेट न लगाना:**
पेड़ के लिए आउटलेट दीवारों पर लगा सकते हैं, एवं उन पर तस्वीरें/पोस्टर भी लगा सकते हैं। लाइटों के लिए आउटलेट खिड़कियों के पास ही लगाएँ। गैर-सर्दियों में इन आउटलेटों का उपयोग रोपाणियों को प्रकाशित करने हेतु भी किया जा सकता है।
**डिज़ाइन:** दारिया शापोश्निकोवा। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
**बालकनी की रेनोवेशन कार्य बाद में ही करना:**
बालकनी की रेनोवेशन कार्य श्रम-आधारित है, साथ ही इससे बहुत ही गंदगी भी हो जाती है – ध्वनिनिरोधक परत लगाना, इन्सुलेशन करना, खिड़कियाँ बदलना आदि। पूरे अपार्टमेंट से बिल्डिंग सामग्री बालकनी तक ले जाने में ही बहुत समय लग जाएगा; इसलिए रेनोवेशन कार्य बाद में ही करना बेहतर रहेगा।
**डिज़ाइन:** तातियाना फुरसोवनोवा। पूरा प्रोजेक्ट देखें।
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