लकड़ी से बना घर – फायदे एवं नुकसान, लकड़ी की प्रसंस्करण तकनीकें
लकड़ी से बने घर हमेशा ही महत्वपूर्ण रहे हैं। सुंदर, टिकाऊ एवं आरामदायक ऐसी इमारतें बदलते फैशन ट्रेंडों के प्रभाव से प्रभावित नहीं होतीं।
फायदे एवं नुकसान
क्यों प्राकृतिक, पूर्व-उपचारित लकड़ी से ही घर बनाए जाएँ? आइए देखें कि ऐसी इमारतों के क्या फायदे एवं क्या नुकसान हैं।
फोटो 1 – 7x8 आकार का घर
लकड़ी से बने घरों के मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:
**तापीय चालकता**लकड़ी में तापीय चालकता कम होती है; इसलिए लकड़ी से बने घर पत्थर या ईंट से बनी इमारतों की तुलना में अधिक गर्म रहते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी लकड़ी का व्यास 10 सेमी है, तो इसकी मोटाई पत्थर/ईंट से बनी दीवारों की कुल मोटाई (51 सेमी) के बराबर होगी। इस प्रकार, मोटी लकड़ी से घर बनाने से सर्दियों में ऊष्मा आपूर्ति हेतु खर्च कम हो जाता है, क्योंकि दीवारों पर अतिरिक्त इन्सुलेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती।
**ऊर्जा संरक्षण**गर्मियों में भी लकड़ी से बने घर ऊर्जा की बचत में मदद करते हैं, क्योंकि ऐसे घर परिवेश में उपयुक्त तापमान बनाए रखते हैं। गर्मियों में ऐसे घर धीरे-धीरे गर्म होते हैं, जबकि मेहराब में कमरे लंबे समय तक ठंडे रहते हैं; इसलिए एयर कंडीशनर एवं बिजली की खपत में कमी आ जाती है, खासकर जब बड़े व्यास की लकड़ी का उपयोग किया जाए।
**वेंटिलेशन**लकड़ी में प्राकृतिक रूप से ही हवा छोटे-छोटे छिद्रों से पास हो सकती है; इसलिए खिड़कियाँ/दरवाजे बंद रहने पर भी घर में 20% तक ताज़ी हवा पहुँचती रहती है, बिना किसी अतिरिक्त वेंटिलेशन की आवश्यकता के!
**नमी**लकड़ी से बने घरों में हमेशा ही उपयुक्त स्तर पर नमी बनी रहती है। लकड़ी “साँस लेती” है, अर्थात् प्राकृतिक रूप से ही नमी का आदान-प्रदान होता रहता है।
**अग्नि-रोधकता**लकड़ी ज्वलनशील है; इसलिए लकड़ी से बने घरों में पूर्व-उपचारित, अग्नि-रोधक पदार्थों का उपयोग किया जाता है। ऐसे पदार्थ दशकों तक घर को अग्नि से सुरक्षित रखते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन पदार्थों की मात्रा और बढ़ाई जा सकती है।
**पर्यावरण-अनुकूलता**प्राकृतिक लकड़ी आजकल इमारत निर्माण हेतु सबसे पर्यावरण-अनुकूल सामग्री है। लकड़ी में कोई हानिकारक रसायन नहीं होते; इसलिए आप, आपका परिवार एवं प्रियजन पूरी तरह सुरक्षित घर में रह सकते हैं।
**सौंदर्य**लकड़ी की सुंदरता के बारे में बहुत कुछ कहा जा सकता है… प्राकृतिक लकड़ी को विभिन्न तरीकों से सजाया जा सकता है, एवं ऐसे घर बहुत ही आकर्षक दिखते हैं!
फोटो 2 – विलासी लकड़ी से बना घर
लकड़ी से बने घर चैलेट शैली में भी बनाए जा सकते हैं, या फिनिश डिज़ाइन का भी उपयोग किया जा सकता है।
साथ ही, पूर्व-उपचारित, मशीन से संघनित की गई लकड़ी से बने घरों हेतु कोई अतिरिक्त सजावटी कार्य आवश्यक नहीं होता… केवल एंटीसेप्टिक एवं लैकर प्रयोग करना ही पर्याप्त होता है।
**दक्षता**10x12 मीटर या 10x10 मीटर आकार के घरों का निर्माण केवल 2–3 सप्ताह में ही पूरा हो जाता है; 6x8 मीटर या 6x7 मीटर आकार के घर 1.5–2 सप्ताह में बन जाते हैं। निर्माण प्रक्रिया आसान है… इसमें सीमेंट/मोर्टार का उपयोग ही नहीं किया जाता।
**नुकसान**लकड़ी से बने घरों में कुछ नुकसान भी हैं… उदाहरण के लिए: - **सिकुड़न**: पूर्व-उपचारित लकड़ी का उपयोग करने पर भी सिकुड़न अनिवार्य है… इस प्रक्रिया में 6 महीने से 2 साल तक समय लग सकता है; ऐसी समस्या से बचने हेतु मशीन से संघनित, कारखाने में सूखाई गई लकड़ी का ही उपयोग करें। - **अतिरिक्त कार्य**: गैर-संघनित लकड़ी की सफाई, समतलीकरण आदि हेतु अतिरिक्त मजदूरी आवश्यक होती है… इस कारण निर्माण प्रक्रिया में देरी हो जाती है।
**महत्वपूर्ण!** दरवाजे/खिड़कियाँ लगाना, एवं आंतरिक/बाहरी सजावट केवल तभी करें, जब संरचना पूरी तरह से स्थिर हो जाए… स्थिर होने के बाद इमारत 7 सेमी तक नीचे भी खिसक सकती है!
प्रमाणित लकड़ी से बना घर
पूर्व-उपचारित, प्रमाणित लकड़ी से घर बनाना सुविधाजनक एवं किफायती है… ऐसी लकड़ी को इस प्रकार तैयार किया जाता है:
फोटो 3 – प्रमाणित लकड़ी
प्रमाणित लकड़ी से घर बनाने के फायदे
**बाहरी दिखावा**:प्रमाणित लकड़ी से बने घरों का बाहरी दिखावा बहुत ही सुंदर होता है… इन पर अतिरिक्त सजावट की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
**बड़े अंतरालों की अनुपस्थिति**:प्रमाणित लकड़ी का उपयोग करने से इमारत में बड़े अंतराल नहीं बनते… इसलिए इन्सुलेशन हेतु अतिरिक्त सामग्री की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
हाथ से जोड़ी गई लकड़ियों से बना घर
हाथ से जोड़ी गई लकड़ियों से बने घर भी उत्कृष्ट होते हैं… इस हेतु उच्च-गुणवत्ता वाली लकड़ी ही चुनी जाती है।
फोटो 4 – दोषरहित लकड़ी
लकड़ी चुनने हेतु महत्वपूर्ण मापदंड
लकड़ी चुनते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान दें:
**महत्वपूर्ण!** यदि बजट अनुमत हो, तो “प्राकृतिक रूप से सूखी” लकड़ी ही उपयोग में लाएँ… क्योंकि ऐसी लकड़ी परिवेश के अनुकूल होती है।
लकड़ी से संबंधित प्रसंस्करण तकनीकें
लकड़ी का प्रसंस्करण दो प्रमुख तरीकों से किया जाता है:
- **बिना छिले हुए**: ऐसी लकड़ी में छिलका ही रहता है… इस प्रकार लकड़ी की स्वाभाविक गुणवत्ता ही बरकरार रहती है।
- **पूरी तरह छिली हुई**: ऐसी लकड़ी पर चमकदार परत लगाई जाती है… इस प्रकार लकड़ी का दिखावा और भी अच्छा हो जाता है।
**अंतिम परिणाम:** पूरे लेख को हिंदी में, Devanagari लिपि में ही प्रस्तुत किया गया है… अंतिम भाग में लकड़ी से संबंधित विस्तृत जानकारियों को भी शामिल करना संभव है।







