इंग्लिश शैली में आंतरिक डिज़ाइन
इस शैली की पहचान तार्किक संपूर्णता एवं उदात्तता, साथ ही सम्मानजनकता एवं संयम से होती है। इस शैली में प्रयुक्त फर्नीचर मजबूत, गुणवत्तापूर्ण होता है, एवं इसे प्राकृतिक लकड़ियों से बनाया जाता है; फायरपल्स भी सुंदर एवं अधिक आकर्षक होते हैं, रंग-बिरंगे पर्दे, उत्तम कलात्मक सजावट, एवं कमरों में सुनहरे रंग का उपयोग भी इस शैली की विशेषताएँ हैं। यह शैली पूर्वी एवं यूरोपीय शैलियों का संयोजन है – एक ओर तो सुंदर, सादगीपूर्ण डिज़ाइन, दूसरी ओर भारत, चीन एवं मध्य पूर्व की पारंपरिक शैलियों का प्रभाव।
**उत्पत्ति का इतिहास:** इस शैली ने पूर्वी सजावटी शैलियों एवं विभिन्न प्रकार की क्लासिक शैलियों को अपने में समाहित किया, एवं हर ऐतिहासिक काल में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रभाव से इसमें और विकास हुआ। इंग्लैंडीय शैली की उत्पत्ति 17वीं-18वीं शताब्दी में ब्रिटिश उपनिवेशों में हुई। रानी विक्टोरिया के काल में इस शैली को “विक्टोरियन शैली” कहा जाने लगा, जबकि राजा जॉर्ज के शासनकाल में “जॉर्जियन शैली” लोकप्रिय हुई।
**इंग्लैंडीय शैली की विशेषताएँ:** - **मजबूत, गुणवत्तापूर्ण फर्नीचर** - **सुंदर फायरपल्स** - **रंग-बिरंगे पर्दे** - **उत्तम कलात्मक सजावट** - **सुनहरे रंग का उपयोग** - **पूर्वी एवं यूरोपीय शैलियों का संयोजन**
**कमरों में इस शैली का अनुप्रयोग:** बड़े क्षेत्र वाले घरों, नए आवासीय कॉम्प्लेक्सों में स्थित शहरी अपार्टमेंटों में यह शैली बहुत ही उपयुक्त है। संग्राहकों के लिए भी यह शैली आदर्श है, क्योंकि इसमें संग्रहीत वस्तुओं को सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया जा सकता है। लाइब्रेरियों में भी इस शैली का अच्छा प्रभाव देखने को मिलता है।
**आधुनिक समय में इंग्लैंडीय शैली:** आजकल भी अंग्रेजी शैली को बहुत ही पसंद किया जाता है; इसमें प्राचीन फर्नीचर, सुंदर लाइटिंग, एवं उत्तम कलात्मक सजावट शामिल है। छोटे अपार्टमेंटों में भी इस शैली को अनुसरण किया जा सकता है, एवं ऐसे घरों में भी यह शैली आकर्षक लगती है।
**“शैबी चिक” शैली का प्रभाव:** हाल ही में “शैबी चिक” नामक एक नयी शैली भी लोकप्रिय हो गई है; इसमें पुराने या कृत्रिम रूप से जीर्ण किए गए फर्नीचर का उपयोग किया जाता है।
**अन्य विशेषताएँ:** - प्राकृतिक सामग्री से बने फर्नीचर - सोच-समझकर लगाई गई फर्नीचर व्यवस्था - कमरों में स्पष्ट एवं तार्किक विभाजन - बड़ी खिड़कियाँ - लकड़ी की छत, जिस पर मजबूत बीम लगे होते हैं - कांच के टुकड़े, जो सजावट में उपयोग में आते हैं - मुख्य कमरों में फायरपल्स की व्यवस्था
**अन्य पहलु:** - दीवारों पर लकड़ी के पैनल एवं हल्के रंग के वॉलपेपर लगाए जाते हैं। - छत पर क्रिस्टल की चिंडीलियाँ लगाई जाती हैं। - फर्नीचर पर सुंदर बनावट की गई कलाकृतियाँ होती हैं। - रंग-पैलेट में भूरे, नारंगी, सुनहरे रंग प्रमुख हैं। - प्रकाश की व्यवस्था ऐसी होती है कि हर क्षेत्र में हल्का प्रकाश उपलब्ध रहे।
**निष्कर्ष:** इंग्लैंडीय शैली, अपनी सुंदरता, आरामदायकता एवं कलात्मकता के कारण, आज भी बहुत ही लोकप्रिय है। छोटे से लेकर बड़े घरों तक, हर जगह इस शैली का अनुप्रयोग किया जा सकता है।
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