1960 के दशक की फर्नीचरों की अनूठी विशेषताओं की यात्रा

यह पृष्ठ निम्नलिखित भाषाओं में भी उपलब्ध है:🇺🇸🇷🇺🇺🇦🇫🇷🇩🇪🇪🇸🇵🇱🇨🇳🇯🇵

1960 के दशक कलात्मक क्रांतियों, नए कलात्मक रूपांकनों एवं परंपराओं से हटकर आगे बढ़ने का प्रतीक था। फर्नीचर डिज़ाइन के क्षेत्र में इस दशक में एक अनोखी शैली का उद्भव हुआ, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती है। चलिए, समय की यात्रा में शामिल होकर 1960 के दशक के फर्नीचर की विशिष्ट विशेषताओं एवं उनके आधुनिक डिज़ाइन पर पड़ने वाले स्थायी प्रभावों का अध्ययन करते हैं。

1. ठोस एवं रंगीन डिज़ाइन

1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनों की विशेषताएँPinterest

1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता थी रंगों का बेधारण उपयोग। उस दौर में चमकीले रंग एवं ठोस पैटर्न प्रचलित थे, जो उस समय के आशावाद एवं उत्साह को दर्शाते थे। एवोकाडो हरा से लेकर फीका पीला तक, 1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनें रंगों की ऐसी पैलेटों का प्रतीक थीं, जो जीवनक्षेत्रों में खुशी एवं उत्साह लाती थीं।

2. प्राकृतिक आकार एवं सीधी रेखाएँ

मध्य-शताब्दी के आधुनिक डिज़ाइनों के प्रभाव से, 1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनों में प्राकृतिक आकार एवं सीधी रेखाएँ प्रमुख थीं। डिज़ाइनरों ने प्रकृति से प्रेरणा लेकर मुड़े हुए आकार, चाप एवं असममित रूपों को अपनी डिज़ाइनों में शामिल किया। परिणामस्वरूप, ऐसी फर्नीचरें बनीं जो सुंदर एवं सामंजस्यपूर्ण लगती थीं, एवं पिछले दशकों की कठोर संरचनाओं से भिन्न थीं।

3. अलग-अलग सामग्रियों का मिश्रण

1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनों की विशेषताएँPinterest

1960 के दशक में, डिज़ाइनरों ने पारंपरिक एवं अपरंपरागत सामग्रियों को मिलाकर नई एवं आकर्षक फर्नीचर डिज़ाइनें बनाईं। लकड़ी, प्लास्टिक एवं धातु को अक्सर ऐसे ही संयोजनों में इस्तेमाल किया गया। “ईम्स” की कुर्सी, जिसमें ढाली हुई लकड़ी एवं चमड़ी का उपयोग किया गया था, ऐसे ही आधुनिक डिज़ाइनों का उदाहरण है।

4. �विष्यवादी एवं अंतरिक्ष-थीम वाले डिज़ाइन

1960 के दशक में, लोग भविष्य एवं अंतरिक्ष अन्वेषण में बहुत रुचि रखते थे। इसी कारण फर्नीचर डिज़ाइनों में भी अंतरिक्ष-थीम वाले तत्व शामिल होने लगे। उपग्रह-आकार के चैनलर, अंडे के आकार की कुर्सियाँ एवं अंतरिक्ष-युग से प्रेरित मेज़, ऐसे ही उदाहरण हैं।

5. सार्वभौमिकता एवं मॉड्यूलर डिज़ाइन

1960 के दशक की फर्नीचर डिज़ाइनों की विशेषताएँPinterest

जैसे-जैसे शहरी जीवनक्षेत्र विकसित होने लगे, ऐसी फर्नीचरों की आवश्यकता भी बढ़ गई, जिन्हें आसानी से अनुकूलित किया जा सके। डिज़ाइनरों ने मॉड्यूलर फर्नीचर बनाए, जिन्हें आवश्यकतानुसार बदला जा सकता था। अलमारियाँ, सोफे एवं अन्य फर्नीचर ऐसे ही डिज़ाइन किए गए, ताकि उनका उपयोग आसानी से किया जा सके।

6. हुनरमंदी एवं गुणवत्ता

भले ही 1960 के दशक में आधुनिक एवं प्रयोगात्मक डिज़ाइन प्रचलित थे, लेकिन हुनरमंदी एवं गुणवत्ता को भी बहुत महत्व दिया गया। उस दौर की कई फर्नीचरें बहुत ही सूक्ष्म ढंग से बनाई गईं, एवं इनमें आकार एवं कार्यक्षमता के बीच सामंजस्य होता था। इसी कारण, 1960 के दशक की फर्नीचरें लंबे समय तक उपयोग में आईं, एवं आज भी कई ऐसी फर्नीचरें मूल्यवान संग्रहणीय वस्तुएँ मानी जाती हैं।

7. प्रसिद्ध डिज़ाइनर एवं अमर डिज़ाइन

1960 के दशक में, कई प्रतिभाशाली डिज़ाइनर थे, एवं उनकी फर्नीचर डिज़ाइनें हमेशा ही सराही गईं। चार्ल्स एवं रे ईम्स, आर्ने जैकोबसेन एवं इरो सैरिनेन जैसे डिज़ाइनरों की रचनाएँ आज भी प्रसिद्ध हैं, एवं उनकी फर्नीचरें आज भी लोगों द्वारा पसंद की जाती हैं।