टेलीविजन का इतिहास: 90 वर्षों में हुई विकास यात्रा

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एक डाक-टिकट के आकार वाली स्क्रीन से लेकर 100-इंच के अल्ट्रा एचडी पैनल तक… हम आपको बताते हैं कि पिछले लगभग एक सदी में टेलीविज़न में क्या-क्या बदलाव आए हैं。

टेलीविजन ने लंबी यात्रा की है… शुरुआत में यह एक बड़ा, धुंधली तस्वीरों वाला एवं खराब आवाज देने वाला उपकरण था; लेकिन अब यह केवल एक सेंटीमीटर मोटी परत वाली, रिमोट कंट्रोल से चलने वाली इंटरैक्टिव स्क्रीन बन गया है। हम आपको बताते हैं कि ऐसा कैसे संभव हुआ।

1920 के दशक: मैकेनिकल टेलीविजन

1925 में, ब्रिटिश आविष्कारक जॉन लॉगी बेयर्ड के कारण पहला मैकेनिकल टेलीविजन बनाया गया। इसमें एक विशेष घूर्णन डिस्क का उपयोग होता था, एवं तस्वीर में केवल 30 ऊर्ध्वाधर रेखाएँ होती थीं। आजकल टेलीविजन प्रति सेकंड 24 फ्रेम दिखाते हैं, जबकि उस समय केवल 5 फ्रेम होते थे। अगले चार वर्षों में 1000 ऐसे उपकरण बिके, जो इस आविष्कारक के लिए एक बड़ी सफलता थी।

जर्मन लोगों ने और भी आगे बढ़ कर 1928 में ऐसा उपकरण विकसित किया, जो प्रोजेक्टर की तरह काम करता था… लेकिन इसमें केवल साये एवं धुंधली छवियाँ ही दिखाई देती थीं।

1929 में, अमेरिकी कंपनी ने पहला ‘विटाफोन’ टेलीविजन बाजार में उतारा।

हालाँकि, इसकी तस्वीर की गुणवत्ता कम होने के कारण यह लोकप्रिय नहीं हुआ… तस्वीर एक स्टैम्प के आकार की थी, एवं लेंस के माध्यम से भी केवल सामान्य रूपरेखा ही दिखाई देती थी… चेहरे तो पूरी तरह से अदृश्य ही रहते थे।

1930 के दशक: इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन

नए दशक में एक बड़ा बदलाव हुआ… 1931 में, रूसी अप्रवासी एवं RCA के कर्मचारी व्लादिमीर ज़्वोर्यकिन ने ‘आइकोनोस्कोप’ नामक उपकरण विकसित किया… यहीं से इलेक्ट्रोमैकेनिकल टेलीविजन से इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन की शुरुआत हुई।

1931 में, बर्लिन में हुए अष्टम रेडियो प्रदर्शनी में जर्मन कंपनी LOEWE ने दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन प्रदर्शित किया… यह मासिक टेलीविजन प्रसारण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।

1933 तक, फ्रांस, ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन बिकने लगे… हालाँकि, सबसे सस्ता मॉडल 445 डॉलर में उपलब्ध था… आजकल यह राशि लगभग 7,500 डॉलर के बराबर है।

1933 में ही, कंपनी LOEWE ने दुनिया का पहला ऐसा टेलीविजन भी बाजार में उतारा, जिसमें डायनामिक स्पीकर था… उस समय इस टेलीविजन की आवाज की गुणवत्ता बहुत ही उच्च थी।

1940 के दशक: यूरोप में संकटद्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एवं उसके बाद कई वर्षों तक यूरोप में टेलीविजन का विकास ही नहीं हुआ… जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में टेलीविजन उत्पादन तेजी से बढ़ा।

1946 में, केवल 5 प्रतिशत परिवारों में ही टेलीविजन उपलब्ध थे; लेकिन 1950 के दशक के अंत तक 77 प्रतिशत लोग टेलीविजन देखने लगे।

1950 के दशक: रंगीन टेलीविजन एवं रिमोट कंट्रोल

1953 में, अमेरिका ने एनालॉग रंगीन टेलीविजन प्रणाली ‘NTSC’ शुरू की… उसी वर्ष 40 हजार रंगीन टेलीविजन बिके।

1950 के दशक में पहला रिमोट कंट्रोल भी विकसित किया गया… इसे अमेरिकी कंपनी ‘Zenith Radio Corporation’ के कर्मचारी यूजीन पोली ने विकसित किया… हालाँकि, इस रिमोट को टेलीविजन से केबल के माध्यम से ही जोड़ा जाता था।

1955 में, ‘फ्लैशमैटिक’ नामक वायरलेस रिमोट कंट्रोल भी बाजार में आया… आज भी इसी सिद्धांत का उपयोग गेट रिमोट एवं मेट्रो टर्नस्टाइल में किया जाता है।

1960 के दशक: पिक्सेल

1960 के दशक की शुरुआत में, अमेरिका ने पहली ‘प्लाज्मा स्क्रीन’ वाले टेलीविजन बाजार में उतारे… शुरूआत में इनका उपयोग रेलवे स्टेशनों एवं हवाई अड्डों पर जानकारी प्रदर्शित करने हेतु किया गया… इन टेलीविजनों में केवल 16×16 पिक्सेल ही थे।

1970 एवं 1980 के दशक: इन्फ्रारेड एवं कंप्यूटर

1974 में, ‘इन्फ्रारेड रिमोट’ का उपयोग शुरू हुआ… आज भी यही तकनीक उपयोग में है। 1980 के दशक में, गेमिंग कंसोल, VCR एवं कंप्यूटरों को भी टेलीविजन से जोड़ा जाने लगा।

1990 के दशक: प्लाज्मा स्क्रीन

पहली पूरी तरह ‘प्लाज्मा’ स्क्रीन 1992 में बाजार में आई… 1997 में, कंपनी LOEWE ने दुनिया का पहला ‘इंटरनेट सुविधायुक्त’ टेलीविजन बाजार में उतारा… यही पहला ‘स्मार्ट टेलीविजन’ था… आज कोई भी आधुनिक टेलीविजन इसके बिना असंभव है।

1998 में, जर्मन कंपनी LOEWE Spheros ने पहला ‘फ्लैट-स्क्रीन’ टेलीविजन भी बाजार में उतारा।

2000 के दशक: डिज़ाइन की प्रतिस्पर्धा

2000 के दशक की शुरुआत में, ‘प्लाज्मा’ स्क्रीन वाले टेलीविजनों के निर्माताओं के बीच इस बात की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई… कि कौन सा टेलीविजन सबसे बड़ा, सबसे पतला होगा… एवं कौन सा टेलीविजन अतिरिक्त इफेक्ट प्रदान करेगा।

2004 में, जापानी कंपनियों ने टेलीविजन के सभी ओर ‘बैकलाइट’ प्रणाली विकसित की… इससे स्क्रीन पर चित्र और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगे… हालाँकि, यह तकनीक जल्दी ही आंखों पर तनाव डालने लगी… इसलिए ऐसे मॉडल बाजार से हटा दिए गए।

2010 के दशक: 8K तकनीक एवं OLED डिस्प्लेआधुनिक टेलीविजनों हेतु सबसे नई तकनीक ‘OLED डिस्प्ले’ है… इसमें कार्बनिक LED का उपयोग किया जाता है, एवं चित्रों में असीमित कंट्रास्ट प्राप्त होता है।

कई निर्माता जल्द ही 8K रिज़ॉल्यूशन वाले टेलीविजन बाजार में उतारने की योजना बना रहे हैं… आधुनिक टेलीविजनों में इंटरनेट सुविधा, स्वचालित सिंक्रनाइज़ेशन, एवं किसी भी मोबाइल उपकरण से प्लेबैक की सुविधा उपलब्ध है।

गूगल के निदेशक केवल डेसाई ने कहा, “टेलीविजन का भविष्य… इसमें मौजूद ‘अंतर’ को खत्म करने में है…”

टेलीविजन का भविष्य… इसमें मौजूद ‘अंतर’ को खत्म करने में है।

डिज़ाइन सुझाव: LOEWEINMYROOM का सुझाव है… केवल 4.9 मिमी मोटे ‘Loewe Bild 4 OLED All in One’ टेलीविजन खरीदें… यह बड़े आकार के 55-इंच वाले टेलीविजनों में भी हल्कापन प्रदान करेगा… ‘Loewe Bild 5 OLED’ टेलीविजन को दीवार पर लगाया जा सकता है, या स्टाइलिश मेटल/काले ओक के स्टैंड पर भी रखा जा सकता है… दोनों ही विकल्पों में 80-वाट की साउंडबार भी शामिल है।