आंतरिक डिज़ाइन में “कल की शैली” क्या मानी जाती है: भाग 2
धातु की अलमारियाँ, छत पर लगी एडिसन की बल्ब, स्टेनलेस स्टील से बने रसोई के उपकरण… हम ऐसे डिज़ाइन समाधानों को आगे भी साझा करते रहेंगे, लेकिन अब ऐसी चीज़ों को हमेशा के लिए त्याग देने का समय आ गया है。
पिछले पोस्ट में हमने बताया था कि अपार्टमेंटों की सुशोभिकरण प्रक्रिया में आधुनिक शैली, जो सरलता, प्राकृतिकता एवं आराम पर आधारित है, किस प्रकार नष्ट हो जाती है। हमने यह भी सुझाव दिए थे कि पुराने ब्रांडों की जगह किन चीजों का उपयोग किया जा सकता है। आज, “स्टूडियो 3.14” डिज़ाइन ब्यूरो के प्रमुख तिमुर अब्द्राखमानोव के साथ हम ऐसे ही समाधानों की सूची जारी कर रहे हैं जिन्हें अब भूल जाना चाहिए。
तिमुर अब्द्राखमानोव – “स्टूडियो 3.14” डिज़ाइन ब्यूरो के निर्देशक
**1. स्टेनलेस स्टील से बने रसोई उपकरणों का उपयोग बंद करें:** स्टेनलेस स्टील से बने रसोई उपकरण अब पुराने दौर में चले गए हैं। कुकटॉप, फ्रिज, ओवन आदि पर मौजूद मैट, चमकदार या रिब्ड धातु की सतहें रखरखाव में कठिन हैं; कड़े पानी एवं छोटी-मोटी दरारों के कारण ये जल्दी ही दागदार हो जाते हैं।
**लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है…** ऐसे उपकरण सामान्य दृश्य में अत्यधिक उल्लेखनीय लगते हैं; जबकि डिज़ाइन के दृष्टिकोण से ऐसी वस्तुएँ दृश्य से छिप जानी चाहिए। इसी कारण रसोई में चमकदार प्रिंट वाले कपड़े अब फैशनेबल नहीं हैं… ऐसे डिज़ाइन अस्वाभाविक एवं अतिरंजित लगते हैं。
**तो क्या इनकी जगह लेना चाहिए?** सफ़ेद रंग की रसोई वर्तमान में बहुत ही फैशनेबल है… सफ़ेद रंग के कैबिनेट पैनल एवं उपकरण “हल्कापन” एवं “स्वच्छता” का प्रतीक हैं… सुबह में सफ़ेद रंग की रसोई अच्छा वातावरण पैदा करती है। शायद यह हमारे स्कैंडिनेवियन शैली के प्रति आकर्षण का ही परिणाम हो… लेकिन सफ़ेद रंग वास्तव में हमारे दिलों पर अपना जादू बना चुका है。
**सफ़ेद शैली को लकड़ी के साथ मिलाकर और भी खूबसूरत बनाया जा सकता है…** ऐसे संयोजन से “शैब्बी-शिक”, “प्रोवेंस” या “क्लासिक” शैली के इंटीरियर आसानी से तैयार हो जाते हैं。
डिज़ाइन: “स्टूडियो 3.14”**2. खिड़कियों पर भारी कपड़ों एवं झुलने वाले पर्दों का उपयोग बंद करें:** जैकवार्ड या ऑर्गेंडी से बने पर्दे एवं झुलने वाले कपड़े छोटे कमरों में जगह को काफी हद तक कम कर देते हैं, एवं प्रकाश को भी रोक देते हैं… साथ ही, इनकी जटिल डिज़ाइन आँखों को परेशान करती है।
**तो क्या इनकी जगह लेना चाहिए?** अब ऐसे कपड़े आसानी से उपलब्ध हैं जो कमरे को जीवंत एवं आरामदायक बना सकें… खिड़कियों पर सरल, हल्के कपड़ों का उपयोग करें… रात्रि में तो लिनन या कैमोफ्लेज वाले पर्दे ही उपयुक्त होंगे。
डिज़ाइन: “स्टूडियो 3.14”**3. “चेवरन” पैटर्न का उपयोग बंद करें:** हाल के वर्षों में “चेवरन” पैटर्न (जिसके तत्व लैटिन अक्षर ‘V’ की तरह होते हैं) डिज़ाइन में काफी लोकप्रिय रहा… लेकिन इसकी कृत्रिमता के कारण अब ऐसे पैटर्नों की जगह अधिक सुसंगत भौमितिक डिज़ाइन ही ले रहे हैं。
**तो क्या इनकी जगह लेना चाहिए?** फैशन में “शिबोरी” नामक जापानी पैटर्न लोकप्रिय हैं… ऐसे पैटर्नों में प्रतिबिंब वाले डिज़ाइन होते हैं… रंगन की तकनीक भी जटिल है… लेकिन परिणाम हमेशा अलग-अलग होता है…
**4. इंटीरियर डिज़ाइन में कलाकृतियों, सींगों एवं टैक्सीडर्मी का उपयोग बंद करें:** इंटीरियर डिज़ाइन में कलाकृतियों, सींगों एवं टैक्सीडर्मी का उपयोग न केवल पुराने दौर की शैली है, बल्कि अब तो ये चीजें “मजाकिया” भी लगती हैं… शहरी इंटीरियर डिज़ाइन में ऐसी वस्तुएँ न केवल अप्रासंगिक हैं, बल्कि डरावनी भी लगती हैं… मशहूर कलाकृतियों की नकलें दीवारों पर लगाना भी अनुचित है…
**तो क्या इनकी जगह लेना चाहिए?** किसी अज्ञात लेकिन अद्वितीय कलाकार की मूल कृति ही इंटीरियर को सुंदर बना सकती है… आधुनिक डिज़ाइनों में तो “अमूर्त कलाकृतियाँ” भी प्रचलित हैं… फोटोग्राफ एवं मैक्रामे से बने पर्दे भी इंटीरियर को सुंदर बना सकते हैं…
डिज़ाइन: “स्टूडियो 3.14”**5. धातु से बने थ्रेशहोल्डर:** जहाँ फर्श की पैटर्निंग ठीक से न हो, वहाँ धातु से बने थ्रेशहोल्डर लगाए जा सकते हैं… लेकिन यदि कमरों में अलग-अलग प्रकार की फर्श सामग्रियाँ हों, तो उनके बीच सुसंगत संक्रमण की व्यवस्था करनी आवश्यक है… लकड़ी, तापमान परिवर्तनों के कारण सिकुड़ती-फैलती है; जबकि सिरेमिक टाइलें ऐसा नहीं करतीं… अतः दोनों प्रकार की सामग्रियों के बीच “लिक्विड कॉर्क” जैसा मध्यस्थ तत्व ही उपयुक्त होगा…
**तो क्या इसकी जगह लेना चाहिए?** “लिक्विड कॉर्क” प्राकृतिक रूप से ही समायोजन कर सकता है… यह किसी भी प्रकार की फर्श सामग्री के साथ अच्छी तरह मेल खाएगा… रबर या कृत्रिम सीलंटों के विपरीत, यह कभी भी सख्त नहीं होता…
डिज़ाइन: “स्टूडियो 3.14”**6. एक ही प्रकार के हार्डवेयर का उपयोग बंद करें:** इंटीरियर डिज़ाइन में क्रोम, निकल, पीतल, काले या सुनहरे रंग के हार्डवेयरों का मिश्रण उपयुक्त है…
**त्रुटियों पर सुधार करें:** मेटल की चमकदार सतहें इंटीरियर को आकर्षक बना सकती हैं… लेकिन ऐसे हार्डवेयरों का उपयोग संयम से करें… शैली के अनुसार ही हार्डवेयर चुनें… क्लासिक इंटीरियरों में “गर्म धातुएँ” (तांबा, पीतल) उपयुक्त हैं; जबकि स्कैंडिनेवियन/मिनिमलिस्ट शैलियों में “ठंडी धातुएँ” (चाँदी, क्रोम) उपयुक्त हैं… विशेष डिज़ाइनों में डिज़ाइनर ही सही विकल्प सुझाएंगे。
**7. कृत्रिम सामग्रियों का उपयोग बंद करें:** चमकदार कृत्रिम सामग्रियाँ इंटीरियर को अस्वाभाविक लगा सकती हैं… ऐसी सामग्रियों के उपयोग से कमरा नकली एवं अतिरंजित लगेगा…
**तो क्या इनकी जगह लेना चाहिए?** प्राकृतिक सामग्रियाँ ही इंटीरियर को सुंदर बना सकती हैं… कंक्रीट, प्लास्टर, लकड़ी आदि… ऐसी सामग्रियाँ हमेशा ही फैशनेबल रहेंगी…
डिज़ाइन: “स्टूडियो 3.14”**8. छत पर केवल एक ही लाइट उपकरण लगाएं:** एक ही लाइट स्रोत से पूरा कमरा रोशन नहीं हो सकता… आरामदायक प्रकाश हेतु कमरे के चारों कोनों में लाइट उपकरण लगाए जाने चाहिए… यदि केंद्रीय रूप से एक ही बड़ा लाइट स्रोत है, तो उसके साथ दीवार एवं फर्श पर भी लाइट उपकरण लगाए जाने चाहिए…
**तो क्या इसकी जगह लेना चाहिए?** LED लाइट ही सबसे उपयुक्त विकल्प हैं… ये प्रकाश को समान रूप से फैलाती हैं… हालाँकि ये महंगी हैं, लेकिन 10 गुना अधिक कुशल हैं… साथ ही, इनकी आयु भी लंबी होती है…
और एक महत्वपूर्ण बात…** मोमबत्तियाँ भी इंटीरियर को सुंदर बना सकती हैं…
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